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Political Analysis
Analysis history

विश्लेषण : इंदिरा गांधी की इमरजेंसी और स्नेहलता रेड्डी की चीखें: तानाशाही की क्रूर कहानी

भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में इंदिरा गांधी द्वारा थोपा गया आपातकाल (1975-77) एक ऐसा काला अध्याय है जिसे याद कर आज भी रूह कांप जाती है। 25 जून 1975 को लोकतंत्र को कुचलकर तानाशाही स्थापित कर दी गई। विपक्षी नेताओं को जेल भेजा गया, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और निर्दोष नागरिकों पर अत्याचारों का सिलसिला शुरू हो गया। ऐसी ही …

Analysis history

विश्लेषण : इंदिरा गांधी, आपातकाल और RSS: लोकतंत्र की रक्षा में संघ का बलिदान

25 जून 1975 को इंदिरा गांधी ने आंतरिक सुरक्षा का बहाना बनाकर देश पर आपातकाल थोप दिया। लोकतंत्र को कुचलते हुए विपक्षी नेताओं को जेल भेजा गया, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई, मूल अधिकार छीन लिए गए और संजय गांधी के नेतृत्व में जबरन नसबंदी जैसे अत्याचार हुए। इस काले कालखंड में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने सबसे बड़ा विरोध क…

ANALYSIS NEWS

विश्लेषण डीलिमिटेशन: कांग्रेस का सबसे बड़ा डर क्यूँ ?

नई दिल्ली। लोकसभा और विधानसभाओं में सीटों की संख्या बढ़ाने वाले डीलिमिटेशन का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में गरमाया हुआ है। कांग्रेस और कुछ क्षेत्रीय दलों को इस प्रक्रिया का सबसे ज्यादा डर सताया हुआ है। कारण स्पष्ट है — 2009 में जब डीलिमिटेशन हुआ था, तो कांग्रेस को फायदा पहुंचा था, लेकिन आज की स्थिति पूरी तरह…

ANALYSIS NEWS

विश्लेषण : पश्चिम बंगाल की राजनीति में उथल-पुथल: चुनावी हार के बाद टीएमसी और अभिषेक बनर्जी पर बढ़ता दबाव

पश्चिम बंगाल की राजनीति में हाल के विधानसभा चुनावों के बाद एक नया दौर शुरू होता दिखाई दे रहा है। लंबे समय तक राज्य की सत्ता पर काबिज रही तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को चुनावी झटका मिलने के बाद पार्टी के भीतर और बाहर दोनों मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी बीच टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक ब…

Analysis

विश्लेषण : कांग्रेस की राजनीति: विपक्ष की भूमिका या लगातार विरोध की रणनीति

भारतीय लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। एक मजबूत विपक्ष सरकार की नीतियों पर सवाल उठाता है, जनता की आवाज़ बनता है और लोकतंत्र को संतुलित बनाए रखता है। लेकिन जब विपक्ष केवल विरोध के लिए विरोध करने लगे और हर राष्ट्रीय उपलब्धि पर संदेह व्यक्त करने लगे, तब जनता के मन में उसकी विश्वसनीयता पर प्रश्…

Analysis

विश्लेषण, भारत-रूस व्यापार में ऐतिहासिक बदलाव: रूसी राजनयिक का बड़ा बयान

रूस के एक वरिष्ठ राजनयिक ने हाल ही में दिए गए बयान से भारत-रूस संबंधों को एक नई ऊँचाई पर पहुँचा दिया है। उन्होंने कहा कि  रूसी बाज़ार भारत के लिए पूरी तरह खुले हैं  और दोनों देशों के बीच व्यापार अब नए स्वरूप में बदल रहा है। सबसे अहम तथ्य यह है कि  करीब 90% भारत-रूस व्यापार अब राष्ट्रीय मुद्राओं (रुपया-रूबल) में हो रहा…

Analysis

विश्लेषण, भारत की राजनीति में क्रांति की आहट: 130वां संवैधानिक संशोधन विधेयक

भारत की लोकतांत्रिक यात्रा में एक ऐतिहासिक मोड़ आने वाला है। लंबे समय से देश की राजनीति में यह परंपरा रही है कि गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे नेता भी सत्ता की कुर्सी पर बने रहते हैं। चाहे प्रधानमंत्री हों, मुख्यमंत्री हों या मंत्री – कानून की धाराओं और मुकदमों के बावजूद वे सत्ता में बने रहते हैं और निर्णय लेते …

analysis islam

विश्लेषण : ईरान-इसराइल युद्धविराम के बाद ईरान में सत्ता संघर्ष और भविष्य की दिशा

🔻 1. युद्धविराम के बाद ख़ामेनेई की संभावित वापसी ईरान और इसराइल के बीच हालिया युद्ध के बाद यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई जल्द ही अपने गुप्त ठिकाने से बाहर आ सकते हैं। करीब दो सप्ताह तक गुप्त बंकर में रहकर उन्होंने खुद को इसराइली हमलों से बचाया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि…

ANALYSIS NEWS

विश्लेषण, राजीव गांधी: बपौती का एक विवादित विरासत

राजीव गांधी भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित नेताओं में से एक थे। उनकी छवि एक युवा, आधुनिक और तकनीक-प्रेमी नेता की बनाई गई, लेकिन उनके कार्यकाल में कई विवाद भी सामने आए। उनकी शिक्षा, राजनीति में प्रवेश, सिख विरोधी दंगे, शाहबानो केस, भोपाल गैस त्रासदी, श्रीलंका में भारतीय शांति सेना की विफलता और बोफोर्स घोटाले से जुड़े क…

analysis crime

पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI का हनीट्रैप: भारतीय वैज्ञानिकों की सुरक्षा में सेंध

भारत की सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों का महत्वपूर्ण योगदान है। यह जानकर दुख होता है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने इन महत्वपूर्ण व्यक्तियों को निशाना बनाकर हनीट्रैप के माध्यम से संवेदनशील जानकारी चुराने का प्रयास किया है। हाल ही में, ब्रह्मोस मिसाइल के इंजीनियर निशांत अग्र…

2024 ELECTION

(EVM) पर उठे सवाल: एलन मस्क कितना सही ? एक विश्लेषण

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM के लेकर सोशल मीडिया एक्स के ओनर एलन मस्क ने एक चौकाने वाला बयान दिया है। मस्क की मानें, तो ईवीएम को एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से हैक किया जा सकता है। अब विपक्षी पार्टियों एलन मस्क के बयान को आधार बनाकर सरकार पर सवाल उठा रही है। भारतीय राजनीति में ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक…

analysis bjp

नरेंद्र मोदी ने लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली

भव्य शपथग्रहण समारोह : नरेंद्र मोदी ने रविवार (9 जून, 2024) को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में लगातार तीसरी बार भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई। समारोह में भारतीय राजनीति, फिल्म, उद्योग और अन्य क्षेत्रों के कई प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने भाग…

ANALYSIS NEWS

कांग्रेस पर "नोट फ़ॉर वोट" का आरोप: सभी 99 सांसदों की सदस्यता रद्द करने की याचिका दाखिल

हाल ही में कांग्रेस पार्टी के खिलाफ एक महत्वपूर्ण याचिका दायर की गई है जिसमें पार्टी के सभी 99 सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की गई है। इस याचिका के केंद्र में कांग्रेस द्वारा चुनाव प्रचार के दौरान "नोट फ़ॉर वोट" का मामला सामने आया है। गारंटी कार्ड के जरिए भ्रम फैलाने का आरोप : याचिकाकर्ता का आरोप है क…

2029

बीजेपी को 2024 चुनावों से सीखने वाले सबक :

2024 के चुनावों से पहले, बीजेपी के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे पिछले चुनावों से सीखे और अपनी रणनीतियों को इस तरह से विकसित करें कि वे विपक्ष के झूठे प्रचार और तथ्यों को तोड़ने वाले कथानकों का प्रभावी ढंग से मुकाबला कर सकें। आइए इन चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा करें और यह देखें कि बीजेपी कैसे इनसे निपट सकती है। 1. ग्राम…

ANALYSIS NEWS

नरेंद्र मोदी की तीसरी पारी: गठबंधन सरकार की चुनौतियाँ और भविष्य की योजनाएँ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर भारतीय राजनीति में कई मील के पत्थर स्थापित कर चुका है। अपने दस वर्षों के कार्यकाल में उन्होंने न केवल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को लगातार दो बार पूर्ण बहुमत दिलाया, बल्कि अनेक महत्वपूर्ण नीतिगत और विधायी निर्णय भी लिए। अब, तीसरी बार सत्ता में लौटने के बाद, संभावनाएँ और चुनौति…

ANALYSIS NEWS

नरेंद्र मोदी के लिए नई चुनौती: अल्पमत में भाजपा और गठबंधन सरकार का अनुभव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राजनीतिक अनुभव काफी विस्तृत और समृद्ध है। उन्होंने 23 वर्षों तक लगातार सरकार चलाने का अनुभव प्राप्त किया है, जिसमें से अधिकांश समय भाजपा के पूर्ण बहुमत वाली सरकारें रही हैं। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद, मोदी पहली बार एक ऐसी गठबंधन सरकार का नेतृत्व करेंगे जिसमें भाजपा अल्पमत में होगी।…