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ANALYSIS NEWS
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अमेरिकी सांसद राइली मूर की धमकियाँ और भारत की संप्रभुता पर विदेशी हमला: FCRA संशोधन विधेयक के पीछे की सच्चाई

अमेरिका के वेस्ट वर्जीनिया से सांसद राइली एम. मूर ने 4 अगस्त 2026 को X (पूर्व ट्विटर) पर एक पोस्ट लिखकर भारत की संप्रभुता पर सीधा हमला बोल दिया। उन्होंने विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को “ईसाइयों पर स्पष्ट हमला” करार दिया और धमकी दी कि अगर यह विधेयक आगे बढ़ा तो भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान प…

ANALYSIS NEWS

विश्लेष, रवीश कुमार वह बेशर्म पत्रकार जो CJP के फर्जी छात्र आंदोलन में पत्रकारों पर हुए हमले को सही ठहरा रहा है :

दिल्ली की सड़कों पर जब कॉकरोच जनता पार्टी के नाम पर जमा उपद्रवी भीड़ पत्रकारों को दौड़ा-दौड़ाकर पीट रही थी, उनके कपड़े फाड़ रही थी, माइक तोड़ रही थी और महिला रिपोर्टरों के साथ अभद्रता कर रही थी, तब रवीश कुमार कहाँ थे? स्टूडियो में बैठे हुए, अपने पुराने और खोखले राग को दोहरा रहे थे—‘गोदी मीडिया लोकतंत्र का हत्यारा है’।…

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विश्लेषण : अली अहमद और द वायर का नया एजेंडा: भारतीय सेना पर हिंदी और हिंदुत्व के नाम पर नफरत फैलाने की कोशिश

भारतीय सेना दुनिया की सबसे अनुशासित, पेशेवर और बहादुर सेनाओं में से एक है। यह सेना न सिर्फ सीमाओं की रक्षा करती है, बल्कि देश की सनातन संस्कृति, एकता और अखंडता का भी प्रतीक है। हाल ही में द वायर में अली अहमद नामक रणनीतिक विश्लेषक (पूर्व कर्नल) का एक लेख छपा, जिसका शीर्षक है – “Indian Army’s New-Found Love for Hindi an…

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विश्लेषण : राम मंदिर दान घोटाला: टिन्नू यादव, चंपत राय और श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल

अयोध्या। श्रीराम मंदिर का निर्माण हिंदू समाज की सदियों पुरानी आस्था और बलिदान का प्रतीक है। 22 जनवरी 2024 को प्राण प्रतिष्ठा के बाद लाखों भक्तों ने श्रद्धा से सोना, चांदी, जेवर और नकद चढ़ावा चढ़ाया। रोजाना 1 करोड़ रुपये से अधिक का चढ़ावा आता है। लेकिन आज वही पवित्र चढ़ावा चोरी और हेराफेरी के आरोपों से घिर गया है।  पूर…

Analysis history

विश्लेषण : इंदिरा गांधी की इमरजेंसी और स्नेहलता रेड्डी की चीखें: तानाशाही की क्रूर कहानी

भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में इंदिरा गांधी द्वारा थोपा गया आपातकाल (1975-77) एक ऐसा काला अध्याय है जिसे याद कर आज भी रूह कांप जाती है। 25 जून 1975 को लोकतंत्र को कुचलकर तानाशाही स्थापित कर दी गई। विपक्षी नेताओं को जेल भेजा गया, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और निर्दोष नागरिकों पर अत्याचारों का सिलसिला शुरू हो गया। ऐसी ही …

Analysis history

विश्लेषण : इंदिरा गांधी, आपातकाल और RSS: लोकतंत्र की रक्षा में संघ का बलिदान

25 जून 1975 को इंदिरा गांधी ने आंतरिक सुरक्षा का बहाना बनाकर देश पर आपातकाल थोप दिया। लोकतंत्र को कुचलते हुए विपक्षी नेताओं को जेल भेजा गया, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई, मूल अधिकार छीन लिए गए और संजय गांधी के नेतृत्व में जबरन नसबंदी जैसे अत्याचार हुए। इस काले कालखंड में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने सबसे बड़ा विरोध क…

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विश्लेषण : मुखौटे के पीछे का एजेंडा: आरफा खानम और ‘न्यूट्रल’ पत्रकारिता की हकीकत

आरफा खानम शेरवानी द वायर की पत्रकार हैं जो खुद को निष्पक्ष और न्यूट्रल बताती हैं। लेकिन उनकी रिपोर्टिंग और वीडियो देखकर साफ पता चलता है कि वे मोदी सरकार की आलोचना करने और इस्लामी मुद्दों को उभारने तक सीमित हैं। वे हिंदुओं के पीड़ित होने वाले मुद्दों जैसे लव जिहाद, धर्मांतरण या हिंदू मंदिरों पर हमलों पर कभी गंभीरता से …

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विश्लेषण :रांची RSS दफ्तर पर ISI का पेट्रोल बम हमला: दुबई के Botim ऐप से जुड़ी पाकिस्तानी साजिश का खुलासा!

झारखंड की राजधानी रांची में 16 जून की आधी रात को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यालय पर हुए पेट्रोल बम हमले ने पूरे देश को चौंका दिया है। इस घटना के तार सीधे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI, दुबई और आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान (TTH) से जुड़े पाए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों की जांच में चौंकाने वाले खुलासे ह…

ANALYSIS NEWS

विश्लेषण डीलिमिटेशन: कांग्रेस का सबसे बड़ा डर क्यूँ ?

नई दिल्ली। लोकसभा और विधानसभाओं में सीटों की संख्या बढ़ाने वाले डीलिमिटेशन का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में गरमाया हुआ है। कांग्रेस और कुछ क्षेत्रीय दलों को इस प्रक्रिया का सबसे ज्यादा डर सताया हुआ है। कारण स्पष्ट है — 2009 में जब डीलिमिटेशन हुआ था, तो कांग्रेस को फायदा पहुंचा था, लेकिन आज की स्थिति पूरी तरह…

ANALYSIS NEWS

विश्लेषण : भारत का कश्मीर विकास की राह पर, जबकि पीओके बदहाली में: दो व्यवस्थाओं की कहानी जिसने पाकिस्तान का सच दुनिया के सामने ला दिया

भारत के जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) की तुलना आज केवल भूगोल की तुलना नहीं रह गई है, बल्कि यह दो अलग-अलग व्यवस्थाओं, दो अलग-अलग नीतियों और दो अलग-अलग सोचों की तुलना बन चुकी है। एक तरफ वह कश्मीर है जहां नई सड़कें बन रही हैं, रेलवे सुरंगें तैयार हो रही हैं, पर्यटन रिकॉर्ड तोड़ रहा है और निवेशकों…

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विश्लेषण : मोदी बनाम नेहरू: जेल की विरासत बड़ी या विकास का मॉडल? भारत के दो प्रधानमंत्रियों पर सबसे बड़ी बहस

भारत के राजनीतिक इतिहास में दो ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिनकी तुलना समय-समय पर होती रही है—जवाहरलाल नेहरू और नरेंद्र मोदी। नेहरू स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने आजादी के आंदोलन में भाग लिया और लंबे समय तक जेल में रहे। वहीं नरेंद्र मोदी एक ऐसे नेता के रूप में उभरे जिन्होंने विकास, सुशासन और वैश्विक मंच पर…

ANALYSIS NEWS

कॉकरोच जनता पार्टी: सोशल मीडिया की रील वाली क्रांति, जो कभी जमीन पर नहीं उतर सकती

भारतीय राजनीति में बार-बार एक पुराना फॉर्मूला दोहराया जाता है- असंतोष को भुनाकर सत्ता परिवर्तन का सपना बेचना। आज की तारीख में यह फॉर्मूला कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के रूप में सामने आया है, जो जेन Z की सोशल मीडिया पर आधारित एक कथित आंदोलन है। 6 जून 2026 को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन ने कुछ सुर्खियां बटोरीं, लेकिन यह सिर्…

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विश्लेषण : 6 जून 2026: कोकरोच जनता पार्टी का स्क्रिप्टेड ड्रामा! अभिजीत दीपके का जंतर-मंतर प्लान देशद्रोह की साजिश

6 जून 2026 को अमेरिका से दिल्ली उतरने वाले स्वघोषित फाउंडर अभिजीत दीपके और उनकी कोकरोच जनता पार्टी (सीजीपी) का जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन एक बड़ा सवाल उठा रहा है। नीट पेपर लीक और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे जैसे मुद्दों को लेकर यह आंदोलन शुरू हो रहा है, लेकिन क्या यह वाकई छात्रों का गुस्सा है या एक…

ANALYSIS NEWS

विश्लेषण : राहुल गांधी का ‘इमरजेंसी’ नैरेटिव: क्या भारत में वित्तीय आपातकाल लगाना वास्तव में संभव है?

राहुल गांधी लगातार देश में इमरजेंसी का भय पैदा कर जनता को डरा रहे हैं। वे 44वें संवैधानिक संशोधन का हवाला देकर दावा करते हैं कि मोदी सरकार लोकतंत्र को खतरे में डाल रही है। लेकिन हकीकत यह है कि आज का मजबूत भारत 1975 के कांग्रेस के काले दौर से बहुत आगे निकल चुका है। अनुच्छेद 352 और 360 के तहत इमरजेंसी लगाने की कोई गुंजा…

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विश्लेषण : पश्चिम बंगाल की राजनीति में उथल-पुथल: चुनावी हार के बाद टीएमसी और अभिषेक बनर्जी पर बढ़ता दबाव

पश्चिम बंगाल की राजनीति में हाल के विधानसभा चुनावों के बाद एक नया दौर शुरू होता दिखाई दे रहा है। लंबे समय तक राज्य की सत्ता पर काबिज रही तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को चुनावी झटका मिलने के बाद पार्टी के भीतर और बाहर दोनों मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी बीच टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक ब…