नेहरू और वामपंथ द्वारा भारत में साहित्य और समाज का नुकसान?
जिनकी उम्र पचास का आकड़ा पार कर चुकी है उन्हें याद होगा को साठ के दशक में रूस से बेहद सस्ती किताबें आती थीं! अब रूस ने कोई धर्मशाला तो खोली नहीं थी! वो इन सस्ती किताबो की अच्छी कीमत देश समाज से अलग ढंग से वसूल रहा था! और ऐसा करने के लिए रास्ता दिया था कामरेड नेहरू ने! नेहरू की जीवनशैली पूंजीवादी थी मगर विचारधारा एक कट…