राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देश के लिए योगदान, PART 1


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को आज लगभग 93 वर्ष हो चुके है, 1925 में दशहरे के दिन डॉ. केसव बलिराम हेडगेवार जी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी। 

सांप्रदायिक हिंदूवादी, फासीवादी और इसी तरह ना जाने कितने अन्य तरह के शब्दों से पुकारे जाने वाले संगठन के तौर पर इसकी आलोचना होती रही है लेकिन हर बार संघ ने खुद पर लगे सारे आरोपों को झूठा साबित किया और जब भी देश को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की जरूरत पारी संघ ने अपना पूरा योगदान दिया। 

आज इस लेख का मकसद ये है की संघ ने कब-कब देश में अपनी उपयोगिता शाबित की है उसकी एक सीरीज लिखने जा रहा हूँ ताकि संघ का महत्वा आपको पता चल सके। 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ # प्रथम पृष्ठ 1947 में आजादी के बाद योगदान 
भारत 1947 में आजाद हुआ था लेकिन भारतवर्ष को अंग्रेजो ने धर्म के आधार पर दो हिस्सों में बाँट दिया था, मुसलमानो को पाकिस्तान मिला और हिन्दुओ को हिंदुस्तान लेकिन कुछ हिस्से ऐसे थे जो की ना पाकिस्तान का हिस्सा बने न ही हिन्दुस्तान का। जी हम बात कर रहे है कश्मीर की जो स्वतंत्र था और वहाँ के राजा थे हरी सिंह, पाकिस्तान ने जबरन कश्मीर पर कब्ज़ा करना चाहा और इसके लिए पाकिस्तान ने कश्मीर पर धाबा बोलदिया। पाकिस्तानी घुसपैठियों ने कश्मीरी औरतो का बलात्कार किया बच्चो बूढ़ो को जिन्दा जला दिया, लूटपाट मचाय। हरिसिंह ये देख परेशान थे अंततः उन्होंने भारत सरकार से मदद मांगी और कहा की अगर भारत सरकार हमारी मदद करती है तो हम भारत का हिस्सा बन सकते है, फिर क्या था सरदार पटेल तथा नेहरू ने अपनी गतिबिधिया सुरु करदी और सेना को आदेश दे दिया गया की पकिस्तान को कश्मीर से खदेड़ दिया जाये। 

अब आप सोच रहे होंगे की इनसब के बिच संघ का योगदान कहाँ  रहा, तो दरअसल अक्टूबर 1947 में जब कश्मीर सिमा पर  तना तानी बढ़ी तो संघ के स्वयंसेवको ने बिना किसी परिछन के पाकिस्तानी घुसपैठियों के गतिबिधियो पर नजर रखा और सेना की उस युद्ध में मदद की। आपको जानकर हैरानी होगी की 1947 के युद्ध में जब भारत और पाकिस्तान आमने सामने थे उसमे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के भी अनेक स्वयंसेवक सेना की मदद करते हुए शहीद हुए थे। 

जब भारत और पकिस्तान दो हिस्सो में अलग हुए थे और चारो तरफ दंगा का माहौल था, नेहरू बेचारे परेशान थे तब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवको ने तक़रीबन 3000 राहत शिविर लगाए थे और बेघरों की निस्वार्थ भावना से मदद की थी। 

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सम्पादक : विशाल कुमार सिंह
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