🔷 संकट में भारत बना क्षेत्रीय नेतृत्वकर्ता
ईरान में जारी अशांति और संघर्ष के बीच कई देशों के नागरिक फंसे हुए हैं। भारत ने न केवल अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने का काम तेजी से किया, बल्कि नेपाल और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों ने भी भारत से अपने नागरिकों को बचाने के लिए आधिकारिक अनुरोध किया, जिसे भारत ने सहर्ष स्वीकार किया।
यह स्थिति केवल एक बचाव मिशन नहीं है, बल्कि भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव और उसके प्रति पड़ोसी देशों के भरोसे का प्रमाण है।
🔷 क्यों भारत पर भरोसा करते हैं पड़ोसी?
- भरोसेमंद नेतृत्व: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति ने बीते दशक में भारत की वैश्विक साख को मज़बूती दी है।
- तेजी से निर्णय लेना: भारत संकट के समय बिना देरी के कदम उठाता है, जैसे यूक्रेन युद्ध में ऑपरेशन गंगा के तहत हज़ारों छात्रों की वापसी।
- क्षेत्रीय भाईचारा: भारत हमेशा 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति का पालन करता रहा है — नेपाल, श्रीलंका, भूटान, बांग्लादेश आदि के साथ मानवीय संबंधों को प्राथमिकता दी गई है।
- संवेदनशीलता और इंसानियत: भारत ने यह कभी नहीं देखा कि कौन सा नागरिक किस देश का है, जब भी ज़रूरत हुई, सहायता के लिए आगे बढ़ा।
🔷 ध्रुव राठी जैसे आलोचकों की हकीकत
जहां एक ओर भारत की विदेश नीति को दुनियाभर में सराहा जा रहा है, वहीं कुछ स्वघोषित "फैक्ट चेकर" और यूट्यूबर जैसे ध्रुव राठी बार-बार भारत की छवि को धूमिल करने की कोशिश करते हैं।
जब भारत ने ईरान से अपने नागरिकों को निकालने की व्यवस्था की और पड़ोसी देशों के भी नागरिकों को सुरक्षित निकालने की घोषणा की, तो ध्रुव राठी जैसे लोग कहते हैं – "India's foreign policy is a disaster."
अब सवाल उठता है —
सच्चाई यही है कि भारत की विदेश नीति आज दुनियाभर में सराही जा रही है। यूरोप से लेकर खाड़ी देशों तक, दक्षिण एशिया से अफ्रीका तक, भारत ने हर मोर्चे पर कूटनीतिक संतुलन और मानवीय मूल्यों की मिसाल पेश की है।
🔷 भारत का रिकॉर्ड: संकट में हमेशा सबसे आगे
- ऑपरेशन गंगा (यूक्रेन युद्ध): भारत ने युद्ध क्षेत्र से 22,000+ छात्रों को सुरक्षित निकाला।
- ऑपरेशन मैत्री (नेपाल भूकंप 2015): भारत ने नेपाल में तुरंत राहत सामग्री, हेलिकॉप्टर और मेडिकल सहायता भेजी।
- ऑपरेशन समुद्र सेतु (COVID-19 लॉकडाउन के समय): विदेशों में फंसे नागरिकों को वापस लाने के लिए नौसेना तैनात की गई।
- ऑपरेशन राहत (यमन संघर्ष): भारत ने अपने नागरिकों के साथ-साथ 40 देशों के नागरिकों को भी बचाया।
अब इस सूची में ईरान से नेपाल और श्रीलंका के नागरिकों को निकालने की ऐतिहासिक पहल भी जुड़ गई है।
🔷 भारतीय विदेश नीति: शक्ति और संवेदना का संतुलन
भारत आज केवल एक आर्थिक या सैन्य शक्ति नहीं है, बल्कि एक मूल्य आधारित वैश्विक नेतृत्वकर्ता बन चुका है। भारत की विदेश नीति चार मुख्य स्तंभों पर टिकी है:
- राष्ट्रहित सर्वोपरि
- पड़ोसियों से मैत्रीपूर्ण संबंध
- मानवता की सेवा
- वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठा की रक्षा
जब अन्य देश संकट में चुप रहते हैं, तब भारत बोलता है। जब कोई दूसरा देश अपने नागरिकों को नहीं निकाल पाता, तब भारत हाथ बढ़ाता है।
🔷 निष्कर्ष: आलोचना से ऊपर उठकर यथार्थ को समझें
ध्रुव राठी जैसे लोग भारत की विदेश नीति को “डिज़ास्टर” कहते हैं, लेकिन उनकी यह राय न तथ्यों पर आधारित होती है, न ज़मीनी सच्चाई पर।
जब भारत के पड़ोसी देश भी भारत पर विश्वास जताते हैं, तब यह दर्शाता है कि भारत आज विश्व में विश्वास और सहायता का दूसरा नाम बन चुका है।
देशवासियों को यह समझना होगा कि सोशल मीडिया की खोखली आलोचना और वास्तविक कूटनीतिक कामयाबी में अंतर होता है। भारत की विदेश नीति आज आत्मनिर्भर भारत की असली पहचान है — निडर, मानवतावादी और क्षेत्रीय नेतृत्व में अग्रणी।
🔷 अंतिम पंक्तियाँ
भारत जब अपने पड़ोसियों के लिए संकटमोचक बनता है, तो यह केवल मदद नहीं होती, बल्कि सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और मानवीय रिश्तों की पुनर्पुष्टि होती है।
जिस देश की सरकार अपने नागरिकों के साथ-साथ पड़ोसी देशों के लोगों की जान बचाने को तैयार हो — उसकी विदेश नीति पर सवाल नहीं, सलाम किया जाना चाहिए।

