आखिर क्यों अंबाला बेस पर ही राफेल को इंस्टॉल किया जा रहा है जाने यह महत्वपूर्ण कारण

क्यों राफेल की तरह पहले मिग 21 और जगुआर भी अंबाला में ही तैनात हुए थे और इससे मुकाबले के लिए चीन के पास कोई फाइटर नहीं हैं...यहां पर तैनाती से पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान के खिलाफ तेजी से एक्शन लिया जा सकेगा, दिलचस्प बात ये भी है कि अम्बाला एयरबेस चीन की सीमा से भी 200 किमी की दूरी पर है। मिराज 2000 जब भारत आया था तो कई जगह रुका था, लेकिन राफेल एक स्टॉप के बाद सीधे अम्बाला एयरबेस पर उतरेगा।एलएसी पर चीन के साथ जारी तनाव के बीच राफेल हमारे लिए बहुत जरूरी भी था। भारतीय वायुसेना ने पहले भी फ्रांस, रूस और ब्रिटेन जैसे देशों से फाइटर जेट खरीदे हैं। फ्रांस से हमने जो भी फाइटर जेट खरीदे हैं, वो सभी दसॉ एविएशन के हैं।इसमें 1953 से 1965 के बीच 104 एमडी 450 ओरागेन (भारत में इसे हरिकेन कहते हैं) खरीदे थे। 1957 से 1973 के बीच 110 एमडी 454 मिस्टेरे-5 खरीदे थे। 1985 में मिराज 2000 खरीदे थे। मिराज का इस्तेमाल हम कारगिल की लड़ाई और बालाकोट एयरस्ट्राइक में भी कर चुके हैं।



क्या है रिपोर्ट पढ़े डिटेल में :-
सबसे ऊपर राफेल का नाम आएगा। आपको बता दें कि भारत को राफेल की पहली डिलीवरी मिलने वाली है और सबसे बड़ी बात यह है कि भारतीय वायु सेना के फाइटर पायलट ही फ्रांस से राफेल को उड़ाकर भारत लाएंगे। राफेल को भारत लाने से पहले इन पायलट स्कोर फ्रांस में ही उड़ान भरने की ट्रेनिंग दी जाएगी। बोर्डेक्स मेरिग्नेक एयरफील्ड से भारतीय पायलट 25 जुलाई को उड़ान भर सकते हैं। 6 एयरक्राफ्ट तीन-तीन विमान के ग्रुप में बंटेंगे। इन विमानों के साथ सी-70 या आईएल-76 जैसे ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट भी होंगे। यह एयरक्राफ्ट टेक्नीशियन इंजीनियर और स्पेयर पार्ट्स को लेकर आएंगे।

इसके लिए एक बड़े विमान की जरूरत है, क्योंकि एक विशेष लोडिंग ट्रॉली के साथ एक स्पेयर इंजन भी होगा। इस समय राफेल अनआर्मर्ड होंगे, इसलिए एक्सटर्नल फ्यूल टैंक की भी जरूरत होगी।आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फ्रांस से भारत आने के बीच सिर्फ एक ही स्टॉप होगा जिसमें पहले तो फ्रांस की वायु सेना राफेल में फ्यूल भरने की सुविधा देगी, वही करीब 4 घंटे तक उड़ान भरने के बाद फ्यूलिंग के लिए और पायलट के आराम के लिए इसको रोकना होगा। वहीं अगर पिछले फाइटर प्लेन की हम बात करें तो मिराज को लाते वक्त इसे कई बार रोका गया था। लेकिन राफेल के केस में ऐसा नहीं होगा इसे सिर्फ एक स्टॉप के बाद सीधे अंबाला एयर बेस पर लैंड करना है।



मिग 21 और जगुआर को भी अंबाला में ही तैनात हुए थे:-
शुरुआत में जगुआर और मिग-21 बाइसन जैसे लड़ाकू विमानों को भी अंबाला एयरबेस पर ही तैनात किया गया था। यह एयरबेस भारत की पश्चिमी सीमा से 200 किमी दूर है और पाकिस्तान के सरगोधा एयरबेस के नजदीक भी है। यहां पर तैनाती से पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान के खिलाफ तेजी से एक्शन लिया जा सकेगा। दिलचस्प बात ये भी है कि अंबाला एयरबेस चीन की सीमा से भी 200 किमी की दूरी पर है। अंबाला एयरबेस से 300 किमी दूर लेह के सामने चीन का न्गारी गर गुंसा एयरबेस है।

अगर हम पहले की बात करें तो शुरुआती दौड़ में जगुआर और mig-21 बायसन जैसे लड़ाकू विमान को भी अंबाला एयर बेस पर ही तैनात किया गया था यह एयरवेज भारत की पश्चिमी सीमा से मात्र 200 किलोमीटर की दूरी पर है और यह एयरवेज पाकिस्तान से काफी नजदीक भी है इस बेस पर फाइटर प्लेन की तैनाती से पाकिस्तान के विरुद्ध तेजी से एक्शन लिया जा सकता है और अच्छी बात तो यह है कि अंबाला एयर बेस से चीन की सीमा भी मात्र 200 किलोमीटर की दूरी पर है यानी अंबाला एयर बेस हर मायने में बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां से हमारे दोनों दुश्मन देशों पर निशाना नजदीक है।



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