उत्तर प्रदेश सरकार ने सनातन हिंदू परंपरा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सोमवार, 6 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में शाहजहांपुर जिले की जलालाबाद तहसील का नाम बदलकर भगवान परशुराम पुरी करने का प्रस्ताव पास कर दिया गया।
भगवान परशुराम जी विष्णु के छठे अवतार माने जाते हैं। वे क्षत्रिय कुल का संहार करने वाले परशुधारी योद्धा के रूप में प्रसिद्ध हैं। परंपरा के अनुसार, जलालाबाद क्षेत्र को भगवान परशुराम जी की जन्मभूमि या उनके द्वारा स्थापित क्षेत्र के रूप में जाना जाता रहा है। नाम परिवर्तन का यह प्रस्ताव लंबे समय से स्थानीय हिंदू संगठनों और सनातनी भक्तों की मांग रही थी। योगी सरकार ने इसे मंजूरी देकर सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को पुनर्स्थापित करने का संकल्प दिखाया है।
कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव के अलावा करीब 28 अन्य अहम मुद्दों पर भी चर्चा हुई। बैठक के बाद आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील शर्मा ने बताया कि स्टार्टअप मिशन की स्थापना, उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 और डेटा सेंटर नीति-2026 को भी मंजूरी मिल गई। ये फैसले प्रदेश में निवेश, नवाचार और रोजगार सृजन को बढ़ावा देंगे।
नाम परिवर्तन की प्रक्रिया अब प्रशासनिक और राजस्व विभागों के माध्यम से पूरी की जाएगी। नए नाम को सभी सरकारी दस्तावेजों, अभिलेखों और नक्शों में अपडेट किया जाएगा। इस बदलाव से क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिलेगी। स्थानीय लोग इसे गौरव का विषय मान रहे हैं।
यह फैसला योगी आदित्यनाथ सरकार की हिंदू संस्कृति संरक्षण नीति का हिस्सा है। पहले भी कई जगहों के नाम बदलकर उनके मूल सनातनी स्वरूप को बहाल किया गया है। भगवान परशुराम जी की याद में यह नामकरण युवा पीढ़ी को उनके आदर्शों से जोड़ेगा। परशुराम जी न्याय, शौर्य और धर्म रक्षा के प्रतीक हैं। इस क्षेत्र का विकास अब धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में हो सकता है।
उत्तर प्रदेश में ऐसे सकारात्मक बदलाव साबित करते हैं कि सरकार विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक पुनरुत्थान पर भी जोर दे रही है। जलालाबाद का 'भगवान परशुराम पुरी' बनना पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणादायक है। जय श्री परशुराम!

