उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में एक बड़े ईसाई धर्मांतरण रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। 'क्रिप्टो क्रिश्चियन' राशिद के नेतृत्व वाले गैंग ने टेंट लगाकर प्रार्थना सभा का आयोजन किया और लगभग 200 हिंदुओं को ईसाई बनाने की कोशिश की। पुलिस ने इस साजिश को नाकाम करते हुए 12 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। मौके से तीन बाइबल और कई पहचान पत्र भी बरामद किए गए।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपी लोगों को ₹50,000 से ₹60,000 तक का नकद लालच और बीमारियों के इलाज का झांसा देकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित कर रहे थे। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को इसकी सूचना मिलते ही उन्होंने विरोध प्रदर्शन किया और पुलिस को बुलाया। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से बड़े स्तर पर होने वाले धर्मांतरण को रोका जा सका।
पुलिस ने 14 आरोपियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 की धारा 3 और 5(1) के तहत मामला दर्ज किया है। मुख्य आरोपी राशिद के अलावा मनीष, संजीव, संगीता, पूजा, मोनू, आशु, चाँदनी, सरिता, अमरीश, कार्तिक, कनक, शीशपाल और प्रवीण शामिल हैं। शेष आरोपियों की तलाश जारी है।
यह घटना हिंदू समाज में चिंता का विषय बन गई है। ऐसे गैंग अक्सर गरीब, अशिक्षित और बीमार हिंदुओं को निशाना बनाते हैं। लालच, धोखा और गुप्त प्रार्थना सभाओं के जरिए सांस्कृतिक हमला किया जाता है। 'क्रिप्टो क्रिश्चियन' शब्द का इस्तेमाल इसलिए हो रहा है क्योंकि ये लोग खुलकर नहीं बल्कि छिपकर हिंदू पहचान बनाए रखते हुए धर्मांतरण कराते हैं।
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि धर्मांतरण के खिलाफ सख्त कानूनों की जरूरत कितनी ज्यादा है। यूपी सरकार के सख्त रुख के बावजूद ऐसे रैकेट सक्रिय हैं, जो सोशल मीडिया, एनजीओ और विदेशी फंडिंग के जरिए काम करते हैं। हिंदू संगठनों की सतर्कता और पुलिस की तेज कार्रवाई ने एक बड़ी साजिश को विफल किया।
हिंदू समाज को जागरूक रहना चाहिए। अपने धर्म, संस्कृति और परंपराओं की रक्षा के लिए हर स्तर पर सतर्कता बरतनी होगी। ऐसे मामलों में तुरंत सूचना देना और कानूनी मदद लेना जरूरी है। मुजफ्फरनगर की यह घटना देश भर में चर्चा का विषय बन गई है और हिंदू एकता की मांग को मजबूत करती है।

