उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के विकासनगर क्षेत्र के बैरागीवाला गांव में शनिवार 13 जून 2026 की शाम एक छोटे से पानी के विवाद ने खूनी रूप ले लिया। बजरंग दल और भाजपा के स्थानीय नेता विनोद कश्यप की इस्लामी भीड़ ने बेरहमी से हत्या कर दी।
आरोपियों ने हथौड़े, बेलचे और अन्य हथियारों से हमला बोल दिया, जिसमें विनोद की मौके पर सिर पर हथौड़े के वार से मौत हो गई, जबकि उनके भाई समेत तीन अन्य परिजन गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद पूरे इलाके में सांप्रदायिक तनाव फैल गया, हिंदू संगठनों ने आक्रोश जताया, तोड़फोड़ हुई और प्रशासन को बुलडोजर कार्रवाई करनी पड़ी।
परिवार के अनुसार, विनोद कश्यप अपने खेत में सिंचाई कर रहे थे। पहले से 14 हजार रुपये के लेन-देन और पानी के उपयोग को लेकर मुस्लिम पक्ष से विवाद चल रहा था। इसी दौरान इम्तियाज के नेतृत्व में 15-20 लोगों की भीड़ हथियार लेकर पहुंची और अचानक हमला बोल दिया। गवाहों और सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा है कि भीड़ ने विनोद और उनके परिवार पर जानलेवा हमला किया। अस्पताल ले जाते समय विनोद की मौत हो गई। यह घटना हिंदू समाज पर हमले की एक और कड़ी साबित हो रही है, जहां छोटी-छोटी बातों को बहाना बनाकर हिंसा की जाती है।
घटना के बाद गुस्साए ग्रामीणों और हिंदू संगठनों ने सड़कें जाम कर दीं। आरोपितों के घरों पर पथराव और आगजनी की खबरें आईं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं। पुलिस ने विनोद के पिता अशोक कुमार की शिकायत पर 12 नामजद और 30-35 अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास और दंगा की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। अब तक चार आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। देहरादून के एसपी क्राइम जितेंद्र चौधरी ने बताया कि बाकी आरोपितों की तलाश जारी है।
प्रशासन ने आरोपितों के घरों पर बुलडोजर चलाकर सख्ती दिखाई है, जो इस बार उचित कदम लगता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले की गहन जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
यह घटना उत्तराखंड में बढ़ती सांप्रदायिक अशांति की तस्वीर पेश करती है। पानी और जमीन जैसे संसाधनों पर विवाद अक्सर एकतरफा हमलों में बदल जाते हैं। विनोद कश्यप जैसे स्थानीय हिंदू नेता, जो बजरंग दल और भाजपा से जुड़े थे, अक्सर ऐसे लक्ष्य बनते हैं। हिंदू समाज में आक्रोश स्वाभाविक है।
वर्षों से मंदिरों पर हमले, लव जिहाद, घुसपैठ और धार्मिक त्योहारों पर पथराव की घटनाएं लगातार हो रही हैं। देहरादून की यह घटना उस पैटर्न को दोहराती है, जहां अल्पसंख्यक समुदाय के कुछ असामाजिक तत्व बहुसंख्यक समाज की सहनशीलता का फायदा उठाते हैं।
देहरादून प्रशासन और पुलिस को निष्पक्ष जांच कर दोषियों को कड़ी सजा दिलानी चाहिए। हिंदू समाज को एकजुट रहकर कानून के रास्ते अपनी आवाज उठानी होगी। ऐसे अपराधों पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाए। विनोद कश्यप की शहादत व्यर्थ नहीं जानी चाहिए। यह घटना हमें याद दिलाती है कि शांति बनाए रखने के लिए कानून का सख्ती से पालन जरूरी है, वरना छोटे विवाद बड़े दंगों का रूप ले सकते हैं।

