बांग्लादेश में एक बार फिर हिंदू समुदाय के धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का घिनौना खेल खेला गया है। रंगपुर डिवीजन के गाईबांधा इलाके में जुमे की नमाज के बाद इस्लामी कट्टरपंथी ने सड़कों पर उतरकर भगवान राम के पोस्टरों पर जूते-चप्पल मारने का अपमानजनक कृत्य किया। यह घटना हिंदू विरोधी मानसिकता को उजागर करती है और साबित करती है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं की स्थिति कितनी खतरनाक हो गई है।
जानकारी के अनुसार, गाईबांधा में राम प्रतिमा के निर्माण को लेकर पहले से ही मुस्लिमों का विरोध चल रहा था। धमकियों के बाद हिंदू मंदिर समिति को निर्माण कार्य रोकना पड़ा। अब जुमे की नमाज के बाद प्रदर्शनकारियों ने राम मूर्ति के खिलाफ नारेबाजी की और पोस्टरों पर जूतों-चप्पलों से हमला बोला।
बांग्लादेश में हिंदू मंदिरों पर हमले, मूर्तियों का अपमान और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार कोई नई बात नहीं है। पाकिस्तान से अलग होने के बाद भी वहां हिंदुओं की संख्या लगातार घट रही है। लाखों हिंदू परिवारों को जबरन धर्मांतरण, लैंड जिहाद और हिंसा का सामना करना पड़ रहा है। राम प्रतिमा निर्माण का विरोध इसी मानसिकता का हिस्सा है।
मंदिर समिति के सदस्य ने मजबूरन कहा कि सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए निर्माण रोक दिया गया है। लेकिन सवाल यह है कि सद्भाव एकतरफा क्यों? क्यों हिंदू अपनी आस्था के प्रतीक भी नहीं बना सकते? बांग्लादेश सरकार की चुप्पी इस्लामी कट्टरपंथियों को और बल दे रही है।
यह घटना भारतीय हिंदुओं के लिए चेतावनी है। बांग्लादेशी घुसपैठियों और लव जिहाद के खिलाफ सख्त कानून जरूरी हैं। भारत में UCC लागू हो, सीमा पर कड़ी निगरानी बढ़े और हिंदू पहचान की रक्षा की जाए। बांग्लादेश जैसे देशों में हिंदू अपमान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाज उठानी चाहिए। जब तक अल्पसंख्यक हिंदू सुरक्षित नहीं होंगे, तब तक शांति की बातें सिर्फ दिखावा हैं।

