कर्नाटक में कांग्रेस की जातिवादी राजनीति एक बार फिर बेनकाब हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सत्ता से जाते वक्त OBC संगठनों को ₹71.8 करोड़ की भारी अनुदान राशि मंजूर कर दी। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कुल राशि में से ₹41 करोड़ से ज्यादा सिर्फ अपने खुद के कुरुबा समुदाय को थमा दिए गए। यह मंजूरी ठीक 3 जून को दी गई—उसी दिन जब सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री पद छोड़ा और DK शिवकुमार ने कमान संभाली।
विपक्ष और जनता ने इसे खुला भाई-भतीजावाद और वोट बैंक की राजनीति करार दिया है। गदग स्थित ‘राकेश सिद्धारमैया ट्रस्ट’ (जो उनके दिवंगत बेटे के नाम पर है) को भी ₹50 लाख की मंजूरी मिली है। सामुदायिक भवन और हॉस्टल बनाने के नाम पर यह फंड बांटा गया, लेकिन लिस्ट देखते ही साफ हो गया कि एक समुदाय पर खास मेहरबानी की गई।
कांग्रेस लंबे समय से जातिगत तुष्टिकरण की राजनीति करती आई है। सिद्धारमैया ने दावा किया कि यह सिर्फ प्रारंभिक मंजूरी है और अभी पैसा जारी नहीं हुआ, लेकिन सवाल उठता है कि आखिरी दिन इतनी बड़ी रकम क्यों मंजूर की गई? कुरुबा समुदाय के संगठनों को सबसे ज्यादा आवेदन मिलने का बहाना देकर उन्होंने पक्षपात के आरोप खारिज किए, लेकिन जनता इसे सत्ता का दुरुपयोग मान रही है।
यह घटना कर्नाटक में कांग्रेस की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करती है। OBC के नाम पर फंड बांटकर वोटों का खेल खेलना, जबकि आम जनता महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रही है। भाजपा और विपक्षी दलों ने इस पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

