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इस्लामी फतवा बन रहा है 1000 बच्चों में 45 बच्चों के मौत का कारण

कराची में नवजात बच्चों के लिए मिल्क बैंक खोला गया। लेकिन धार्मिक उलेमाओं के कट्टरता वाले फतवे के कारण मिल्क बैंक को बंद करना पड़ा और इसके पीछे वजह यह दी गई की इस्लाम में मान्यता है कि अगर कोई बच्चा किसी का दूध पीता है तो उस बच्चे और उस महिला के बच्चों के बीच निकाह नहीं हो सकता। आपको बता दे कि हर वर्ष 1000 में से 45 बच्चों की जान सिर्फ दूध की वजह से जाती है।

कराची में नवजातों के लिए मिल्क बैंक की स्थापना :
कराची में नवजातों के लिए एक मिल्क बैंक खोलने की खबर ने सभी को राहत की सांस दी। नवजातों के लिए स्तन के दूध की उपलब्धता की योजना थी, जो उनकी सेहत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। लेकिन यह खुशी अधिक समय तक नहीं टिक सकी। एक महीने बाद ही इस बैंक को बंद करना पड़ा। 

मिल्क बैंक की स्थापना में धार्मिक विचारों का प्रभाव :
द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, सिंध इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ एंड नियोनेटोलॉजी (एसआईसीएचएन) के कार्यकारी निदेशक डॉ. जमाल रजा ने बताया कि इस मिल्क बैंक पर एक साल से काम चल रहा था। उन्होंने जामिया दारुल उलूम कराची के मौलवियों के साथ आठ महीनों तक गहन चर्चा की थी। अंततः मदरसा से मंजूरी मिलने के बाद 12 जून को बैंक का उद्घाटन हुआ।

फतवा की वापसी और बैंक का बंद होना :
डॉ. जमाल रजा ने आगे बताया कि मदरसा ने अब अपनी सहमति का फतवा वापस ले लिया और कहा कि नई राय मिलने पर उन्होंने फैसला किया कि अस्पताल के लिए उनकी शर्तें पालन करना असंभव होगा। पाकिस्तान उलेमा काउंसिल के अध्यक्ष हाफिज मुहम्मद ताहिर महमूद अशरफी ने भी इस पर सहमति जताई और कहा कि इसे प्रोत्साहित करने की जरूरत नहीं है।

धार्मिक और सामाजिक चिंताएँ :
इस्लाम में मान्यता है कि अगर कोई बच्चा किसी का दूध पीता है तो उस बच्चे और उस महिला के बच्चों के बीच निकाह नहीं हो सकता। इसी कारण से मजहबी उलेमाओं ने फतवा वापस लिया। इस फैसले ने मिल्क बैंक की स्थापना को असंभव बना दिया।

स्वास्थ्य और आर्थिक प्रभाव :
मिल्क बैंक का बंद होना एक चिंताजनक विषय है। एक तरफ आर्टिफिशियल दूध महंगा होता है और दूसरी तरफ, फॉर्मूला दूध से नवजातों को संक्रमण का खतरा होता है। कई माँएं ऐसी होती हैं जिन्हें दूध की समस्या होती है, जिससे उनके बच्चों को कठिनाइयाँ होती हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. डीएस अकरम ने कहा कि स्तन का दूध शिशुओं को वह सुरक्षा प्रदान करता है, जो फॉर्मूला दूध नहीं कर सकता।

विशेषज्ञों की राय :
डॉ. डीएस अकरम का कहना है कि स्तन का दूध समय से पहले जन्मे शिशुओं की रक्षा करता है। यदि उन्हें फॉर्मूला दूध दिया जाता है, तो उन्हें नेक्रोटाइज़िंग एंटरोकोलाइटिस नामक गंभीर आंत संक्रमण का खतरा होता है। 

पाकिस्तान की नवजात मृत्यु दर :
पाकिस्तान जनसांख्यिकी और स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2018 के अनुसार, मुल्क में नवजात मृत्यु दर प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 42 है, जो दुनिया में सबसे अधिक है। एसआईसीएचएन में नवजात शिशुओं की गहन देखभाल इकाई के डॉ. सैयद रेहान अली ने मिल्क बैंक बंद होने पर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि मिल्क बैंक नवजात मृत्यु दर को कम करने का एक तरीका था।

कराची में नवजातों के लिए मिल्क बैंक का बंद होना एक बड़ा धक्का है। धार्मिक और सामाजिक चिंताओं के कारण, इस महत्वपूर्ण परियोजना को बंद करना पड़ा, जिससे नवजातों और माताओं के लिए कठिनाइयाँ बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि माँ के दूध की कमी से नवजात शिशुओं की मृत्यु दर बढ़ सकती है। पाकिस्तान में नवजात मृत्यु दर पहले से ही बहुत अधिक है, और मिल्क बैंक इसे कम करने का एक महत्वपूर्ण उपाय हो सकता था।

निष्कर्ष :
कराची में नवजातों के लिए मिल्क बैंक की स्थापना और बंद होने की कहानी धार्मिक, सामाजिक और स्वास्थ्य मुद्दों का मिश्रण है। नवजातों के लिए स्तन का दूध अत्यंत महत्वपूर्ण है, और इस प्रकार की परियोजनाओं को समर्थन मिलना चाहिए ताकि नवजात शिशुओं की मृत्यु दर को कम किया जा सके। पाकिस्तान के संदर्भ में, इस प्रकार की परियोजनाओं का महत्व और भी बढ़ जाता है।


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