परवेज टाक को सजा-ए-मौत : मुंबई की सत्र अदालत ने बॉलीवुड अभिनेत्री लैला खान और उनके परिवार के निर्मम हत्याकांड में दोषी पाए गए परवेज टाक को सजा-ए-मौत सुनाई है। परवेज को इस माह की शुरुआत में हत्या और सबूतों को नष्ट करने के मामले में दोषी ठहराया गया था।
हत्याकांड की घटना :
9 मई, 2024 को अदालत ने सुनवाई के बाद परवेज को दोषी माना। परवेज पर आरोप था कि उसने लैला खान समेत उनके 4 अन्य भाई-बहनों और माँ की हत्या कर दी थी। पुलिस को बिस्तर और तकिये से लिपटी हुई उनकी लाशें एक सुनसान फार्महाउस में दफनाई हुई मिली थीं।
हत्याओं का कारण और घटना का विवरण :
परवेज टाक, शेलीना का तीसरा पति था। शेलीना का अपने दूसरे पति आसिफ शेख के साथ नजदीकी संबंध परवेज को पसंद नहीं था और इसी कारण से विवाद हुआ। परवेज ने लोहे की रॉड से शेलीना के सिर पर वार किया, जिसके बाद उसने एक-एक कर शेलीना और उनके बच्चों को मारा। लैला खान और उनके जुड़वाँ भाई-बहन इमरान और ज़ारा भी परवेज की क्रूरता का शिकार बने।
वित्तीय उद्देश्य और साजिश :
परवेज टाक को पता था कि लैला खान और उनके भाई-बहन के पास आभूषण और 2 करोड़ रुपये थे। उसने इस लालच में मीरा रोड पर उन्हें मिलने के बहाने बुलाया और हत्या कर दी। हत्या के वक्त लैला खान मात्र 31 वर्ष की थी।
पुलिस की जांच और परवेज की गिरफ्तारी :
लैला खान के अब्बा नादिर पटेल ने अपने परिवार के गायब होने की शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने मोबाइल डेटा के आधार पर परवेज टाक की गिरफ्तारी की। परवेज को जम्मू कश्मीर में ठगी के एक मामले में पकड़ा गया था, जहाँ उसने हत्या की बात कबूल की। 10 जुलाई, 2012 को फार्महाउस में खुदाई के बाद लाशें निकाली गईं।
कोर्ट की कार्यवाही :
परवेज टाक ने लगातार अपने बयान बदले, जिससे केस में और पेचीदगियाँ आईं। लेकिन 41 गवाहों की पेशी के बाद अदालत ने परवेज को दोषी ठहराया और उसे सजा-ए-मौत सुनाई।
परिवार का दर्द :
शेलीना के पहले शौहर नादिर पटेल ने बताया कि परवेज टाक शेलीना और उनके बच्चों को दुबई शिफ्ट होने के लिए दबाव बनाता था और वेश्यावृत्ति कर के पैसे कमाने के लिए कहता था। परवेज टाक अपनी बीवी की संपत्ति हड़पना चाहता था और उसे डर था कि शेलीना और उसके बच्चे उसे छोड़कर दुबई में बस जाएँगे।
इस भयानक हत्याकांड ने बॉलीवुड और पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। न्याय की इस लड़ाई में पीड़ित परिवार को आखिरकार इंसाफ मिला, लेकिन यह घटना हमेशा एक दर्दनाक याद के रूप में जीवित रहेगी।

