प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मौन व्रत पर कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंहवी ने आपत्ति जताई है, जिसे चुनाव आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया गया। कांग्रेस का आरोप है कि यह आचार संहिता का उल्लंघन है। मोदी की यह यात्रा 2019 की पुनरावृत्ति है, जब उन्होंने बाबा केदारनाथ में ध्यान लगाया था। इस बार वे कन्याकुमारी की दिव्य शिला पर ध्यान लगा रहे है, जो स्वामी विवेकानंद के ध्यान स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। विवेकानंद शिला का निर्माण और मिशनरी विरोध का इतिहास भी महत्वपूर्ण है।
मोदी का मौन व्रत और कांग्रेस की आपत्ति :
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मौन व्रत को लेकर कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंहवी ने चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया है। कांग्रेस का आरोप है कि मोदी का यह व्यक्तिगत मामला नहीं है, बल्कि आचार संहिता का उल्लंघन है। कांग्रेस का मानना है कि इससे मोदी को अप्रत्यक्ष रूप से मीडिया का प्रसारण मिल जाएगा।
2019 की पुनरावृत्ति: ध्यान और आस्था :
मोदी के इस मौन व्रत की याद 2019 के अंतिम मतदान की पूर्व संध्या को बाबा केदारनाथ में ध्यान लगाने की घटना से होती है। इस बार वे कन्याकुमारी की दिव्य शिला पर ध्यान लगाने जा रहे हैं, जहाँ स्वामी विवेकानंद ने भी ध्यान किया था। इस ऐतिहासिक स्थल का महत्व और मोदी की इस यात्रा को लेकर जनता में उत्साह है।
स्वामी विवेकानंद की ऐतिहासिक यात्रा :
स्वामी विवेकानंद ने 1892 में कन्याकुमारी की शिला पर ध्यान किया था, जहाँ उन्होंने भारत की दीनता का मूल कारण और समाधान पाया। यह शिला हिन्दू जनमानस के लिए पवित्र स्थल बन गई है।
विवेकानंद शिला का निर्माण और मिशनरी विरोध :
1963 में स्वामी विवेकानंद की जन्मशताब्दी पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रयास से इस शिला पर विवेकानंद की प्रतिमा स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया। हालांकि, मिशनरी इसे 'सेंट जेवियर रॉक' के रूप में स्थापित करना चाहते थे।

