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    अरविंद केजरीवाल का पॉलिटिकल ड्रामा पार्टी फंड के लिए लोगों से मांगने हैं चंदा




    नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका भारत आइडिया में दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं अरविंद केजरीवाल के बारे में जो कि पार्टी को आर्थिक संकट से उभारने के लिए चंदा एकत्रित करने की मुहिम शुरू की है.
    अरविंद केजरीवाल का पॉलिटिकल ड्रामा पार्टी फंड के लिए लोगों से मांगने हैं चंदा

    क्या है माजरा :
    जी हां दोस्तों आपने सही सुना दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पार्टी को आर्थिक संकट से उभारने के लिए चंदा एकत्रित करने की एक नई मुहिम शुरू की है, पार्टी के लिए चंदा देने वालों को प्रोत्साहित करने के लिए और उन में उत्साह जगाने के लिए अरविंद केजरीवाल ने पार्टी के खाते में हर माह ₹11000 खुद जमा करने का ऐलान किया है. इतना ही नहीं अरविंद केजरीवाल ने इस मुहिम में अपने परिवार को भी शामिल किया है जिसमें केजरीवाल की पत्नी हर माह ₹5000, पिता हर माह ₹500 और बेटी हर माह ₹500 का चंदा पार्टी को देंगी.




    केजरीवाल ने माँगा चंदा :
    आपको बता दें कि सोमवार को तालकटोरा स्टेडियम में इस मुहिम की शुरुआत की गई, चुकीं आने वाले अगले 2 वर्षों में राज्य तथा लोकसभा दोनों के चुनाव होने हैं और इसके लिए अरविंद केजरीवाल के अनुसार पार्टी के पास पर्याप्त धनराशि नहीं है इसीलिए यह मुहिम शुरू की गई है.अरविंद केजरीवाल ने यह भी कहा कि अगर सरकार में आने के बाद वे ठेकेदारों से केवल 1% भी कमीशन लेते तो आज पार्टी फंड में दो हजार करोड़ से ज्यादा की रकम होती है.




    चंदा के लिए संपर्क सूत्र भी जारी किया :
    आपको बता दें कि आप संयोजक ने कहा की दिल्ली सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक, अस्पताल में इलाज करवाने वाले मरीज, सस्ती बिजली का इस्तेमाल करने वाले सभी लोग उनकी पार्टी को चंदा दे ताकि राष्ट्र का निर्माण हो सके, जिसके लिए पार्टी के तरफ से 98710 10101 नंबर की हेल्पलाइन भी शुरू की है जिस पर कॉल करके चंदे के लिए संपर्क किया जा सकता है.




    ये सब एक पोलिटिकल ड्रामा है :
    बहरहाल जो भी हो लेकिन यह आम आदमी पार्टी का सिर्फ और सिर्फ एक नाटक है क्योंकि हमने देखा है अरविंद केजरीवाल जो खुद को आम आदमी कहते हैं हमेशा बिजनेस क्लास में सफर करते हैं और जब उनका जन्म दिन आता है तो उनके केक का साइज देख कर के तो यह कभी नहीं लगता कि वह एक आम आदमी है.




    संपादक : विशाल कुमार सिंह