जवानो की आपबीती 1 जून की/What happened with CRPF

पढ़े जवानो की वो आपबीती जो आपके रूह को हिला देगी, जवानो ने खुद बताया अपना दर्द कैसे पथरबाजो के बिच से खुद को बहार निकाला, पढ़े पूरी खबर :





1 जून की घटना सब को तो पता होगी की क्या हुआ था कैसे पथरबाजो ने CRPF की गाड़ी को घेर कर पथरबाजी की थी, जिसमे एक युवक की गाड़ी के निचे आने से मौत हो गयी थी। इस घटना के बाद मनो जैसे नेताओ की जल गयी हो उन्होंने अपने एसी रूम से बैठ कर ट्वीट करना सुरु किया की सेना ने बहोत गलत किया है, सेना को सैयम के साथ काम लेना चाहिए था, इन लोगो ने सना को दोषी ठहराया, सेना के जवानो पर FIR तक हो गयी थी। लेकिन इनको ये पता नहीं की जब आपको हजारो की संख्या में लोग घेरे हुए हो तो और पत्थर से आप पर हमला कर रहे हो तो उस वक़्त खुद पर क्या बिताती है।

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बतादे की जिस वक़्त जवानो के जीप को घेरा गया था उस वक़्त उस गाड़ी में एक अधिकारी समेत 1 ड्राइवर और चार जवान थे। इन पांचो ने एक टीवी चैनल से बात करते हुए उस दिन की आपबीती बताई जिसे सुनकर आपकी रूह काँप जाएगी, अपको ऐसा लगेगा की उन पथरबाजो को फांसी दे देनी चाहिए। CRPF के जवानो ने बताया की उस दिन की स्थिति काफी भयावह हो गयी थी की हमारी जान भी जा सकती थी।अपनी बात को जवानो ने आगे बढ़ाते हुए कहा की पथरबाजो के हाथ में उस दिन जो आरहा था उससे वो हम पर हमला कर रहे थे, कुछ पथरबाजो ने तो जवानो को गाड़ी से भी बहार निकालने की कोशिश की जिसमे वो सफल नहीं हो पाए।इतना कुछ होने के बाद भी जवानो ने अपनी बन्दुक नहीं निकाली और उन पथरबाजों पर हमला नहीं किया बल्कि ये सोचते रहे की बिना इन पथरबाजो को घायल कर के कैसे निकला जाये।

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उस दिन गाड़ी में बैठे 25 वर्षीय विशाल जी पवार जो की गाड़ी के चालक भी थे, उनका कहना है "जैसा तश्वीर में आपको दिख रहा है हालात उससे भी ख़राब थे, भीड़ इतनी थी की वहां का खिसकना मुश्किल हो गया था, चारो तरफ से हिंसक जीप को कस के हिलने की कोशिश कर रहे थे ताकि जीप पलट जाये, पथराव इतना तेज थे और भीड़ इतनी थी की आगे कुछ दिख ही नहीं रहा था की सामने क्या आ रहा या नहीं आ रहा है और मुझे तो पता भी नहीं चालाकी कब कोई मेरी गाड़ी के निचे आके दब  गया  "

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पवार ने अपनी बातो को आगे बढ़ाते हुए कहा की "जब ये घटना हुई और उसके अगले दिन जब हमने ये वीडियो देखा तो हमें लगा की वीडियो में ये घटना जितनी साधारण दिख रही है उतनी है नहीं, उसदी हमने मौत को अपनी आँखों से देखा था, वो दिन मेरी जिंदगी का सबसे ख़राब दिन था। उन्मादीओ ने तो गाड़ी में भी आग लगाने की कोशिश की, हमने जैसे तैसे गाड़ी को वहाँ से निकाला और अगर हम वहाँ से नहीं निकलते तो हमरे साथी मारे जाते।

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उस दिन ड्राइवर की बगल वाली शीट पर एस एस यादव बैठे हुए थे, 54 वर्षीय यादव ३० वर्षो से सेना के लिए देश के लिए काम कर रहे है। यादव की पोस्टिंग 3 बार कश्मीर में हो चुकी है लेकिन उनके मुताबित जिस दिन ये घटना हुई वो सबसे भयवाह और ख़राब दिन था उनके लिए। यादव ने बताया की "उस दिन हमें अपनी जान बचानी थी कैसे भी, एक वक़्त तो ऐसा आया की मेरी हाथ बन्दुक पर भी चली गयी थी लेकिन मैंने ईश्वर की प्रार्थना किया की ऐसी नौबत न ए ार हमारे सारे साथी यहाँ से सुरक्षित निकल जाये।

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 उसदिन यादव और पवार के साथ कांस्टेबल नाटेकर, राम अवतार और राम नरेशि भी मौजूद थे , तीनो के मुताबित उस दिन जो भी हुआ वो जानबूझ कर नहीं किया गया था। राम अवतार बताते है की उस दिन हमारी जान जा सकती थी फिर भी हमने बिना हथियार उठाये भीड़ का सामना किया और वहाँ से हम निकले।

सम्पादक : विशाल कुमार सिंह

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