‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) यानी अभिजीत दीपके की यह फर्जी पार्टी एक बार फिर से विवादों के घेरे में आ गई है। जो NEET पेपर लीक के नाम पर छात्रों को सड़कों पर उतारकर सरकार के खिलाफ जहर घोल रही थी, उसी पार्टी की वेबसाइट से हजारों छात्रों-नाबालिगों की संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी लीक हो गई है। नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, जन्मतिथि और उम्र जैसी डिटेल्स अब साइबर अपराधियों के हाथ लग सकती हैं। यह न केवल डेटा सुरक्षा का घोर उल्लंघन है, बल्कि नाबालिग बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ भी है।
1 जुलाई 2026 को OSINT विशेषज्ञ निसर्गा ने X (पूर्व ट्विटर) पर यह चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने CJP की वेबसाइट cockroachjantaparty.org में गंभीर सुरक्षा खामियां पाईं, जिनके कारण पर्सनल इंफॉर्मेशन (PII) और सोर्स कोड लीक हो रहा था। निसर्गा ने स्क्रीनशॉट्स के साथ CJP के प्रवक्ताओं को टैग करते हुए CERT-In को भी सूचना दे दी।
सबसे गंभीर बात यह है कि इस वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन करने वालों में 14 से 17 साल के नाबालिग छात्रों की अच्छी खासी संख्या है। ये बच्चे CJP के भड़कावे में आकर NEET लीक के खिलाफ ‘प्रोटेस्ट’ में शामिल हो रहे थे। अब उनकी निजी डिटेल्स लीक होने से वे साइबर फ्रॉड, पहचान चोरी, ऑनलाइन उत्पीड़न और अन्य अपराधों का आसान शिकार बन सकते हैं। क्या CJP के नेता इसकी जिम्मेदारी लेंगे? या फिर इस बार भी मोदी सरकार पर आरोप लगाकर भाग खड़े होंगे?
CJP की वेबसाइट में क्या थी खामी?
OSINT विशेषज्ञों के अनुसार, वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन फॉर्म पूरी तरह असुरक्षित था। कोई एन्क्रिप्शन नहीं, कोई प्रॉपर डेटा प्रोटेक्शन नहीं। रजिस्टर करने वाले किसी भी व्यक्ति की जानकारी आसानी से एक्सेस की जा सकती थी। निसर्गा ने बताया कि उन्होंने CJP और CERT-In दोनों को सूचित कर दिया, लेकिन अब तक कोई ठोस जवाब नहीं आया है। यह साफ दिखाता है कि CJP नाम की यह पार्टी सिर्फ प्रचार और भ्रम फैलाने के लिए बनी है, न कि छात्रों की असली मदद के लिए।
अभिजीत दीपके और उनकी टीम NEET लीक जैसे संवेदनशील मुद्दे को हथियार बनाकर युवाओं को भड़का रही थी। लेकिन खुद उनकी वेबसाइट छात्रों के डेटा की सुरक्षा नहीं कर पाई। यह दोहरा मापदंड है। एक तरफ सरकार पर लीक का आरोप, दूसरी तरफ खुद डेटा लीक करवाना। CJP को ‘कॉकरोच’ नाम इसलिए मिला क्योंकि ये बार-बार उभरकर सिस्टम को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करती है।
पहले भी CJP का झूठ पकड़ा गया
याद कीजिए, कुछ समय पहले CJP ने दावा किया था कि मोदी सरकार ने उनकी वेबसाइट बंद कर दी है। लेकिन तकनीकी जांच में यह दावा पूरी तरह झूठा साबित हुआ। डोमेन 16 मई 2026 को लिथुआनिया की कंपनी Hostinger के जरिए रजिस्टर हुआ था। बाद में clientHold स्टेटस लगने से वेबसाइट ग्लोबली अनुपलब्ध हो गई। यह सरकारी ब्लॉक नहीं, बल्कि डोमेन मैनेजमेंट की सामान्य प्रक्रिया थी। CJP ने इसे भी राजनीतिक साजिश बताकर प्रचार किया। अब डेटा ब्रिच का मामला सामने आया है, तो फिर कौन-सी बहानेबाजी करेंगे?
यह घटना दिखाती है कि विपक्षी ताकतें और उनके समर्थक संगठन छात्र आंदोलनों को हाईजैक करके राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। NEET लीक एक गंभीर मुद्दा है, लेकिन इसका समाधान जिम्मेदारी से होना चाहिए, न कि युवाओं को भड़काकर। CJP जैसे ग्रुप छात्रों का डेटा सुरक्षित रखने में नाकाम रहे, तो वे आंदोलन की बात कैसे करते हैं?
नाबालिगों की सुरक्षा पर सवाल
भारतीय कानून नाबालिगों की जानकारी की सुरक्षा पर सख्त है। IT एक्ट, डेटा प्रोटेक्शन नियमों के तहत ऐसी लापरवाही पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई हो सकती है। अगर CJP की लापरवाही से किसी बच्चे को नुकसान पहुंचा, तो जिम्मेदार कौन होगा? अभिजीत दीपके? या उनके पीछे छिपे राजनीतिक आकाओं?
यह मामला सिर्फ एक वेबसाइट की खामी नहीं है। यह उन ताकतों का चेहरा उजागर करता है जो छात्रों को इस्तेमाल करके सत्ता के खिलाफ माहौल बनाना चाहते हैं। NEET जैसे परीक्षा सुधार के मुद्दे पर बहस होनी चाहिए, लेकिन फर्जी आंदोलनों और डेटा लीक से युवा पीढ़ी को खतरा पैदा हो रहा है।
CJP की असली मंशा क्या है?
CJP का पूरा अभियान छात्रों के नाम पर राजनीतिक प्रचार का हिस्सा लगता है। NEET लीक पर सरकार ने जांच कमेटी बनाई, गिरफ्तारियां हुईं, लेकिन CJP जैसे लोग इसे सांप्रदायिक रंग देने या बड़े पैमाने पर अराजकता फैलाने की कोशिश करते हैं। अब उनकी खुद की वेबसाइट से डेटा लीक हो गया, तो सारा खेल खुल गया।
हिंदू राष्ट्रवादी दृष्टिकोण से देखें तो ऐसे संगठन सनातन मूल्यों और राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ काम करते दिखते हैं। छात्रों को गुमराह करके देश की युवा शक्ति को कमजोर करना उनकी रणनीति है। पंजाब, बंगाल जैसी जगहों पर भी इसी तरह की ताकतें शिक्षा और समाज को बांटने की कोशिश करती हैं।
क्या होना चाहिए आगे?
- CJP को तुरंत अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए और प्रभावित छात्रों को मुआवजा देना चाहिए।
- CERT-In और साइबर पुलिस को पूरी जांच करनी चाहिए।
- सभी रजिस्टर्ड यूजर्स को सूचित करके उनके डेटा को सुरक्षित करना चाहिए।
- सरकार को ऐसे फर्जी संगठनों पर नजर रखनी चाहिए जो छात्र आंदोलनों का राजनीतिकरण कर रहे हैं।
यह घटना एक सबक है। युवाओं को चाहिए कि वे किसी भी संगठन पर अंधा विश्वास न करें। अपनी जानकारी साझा करते समय सतर्क रहें। CJP जैसी ‘कॉकरोच’ पार्टियां बार-बार उभरेंगी, लेकिन जागरूक जनता उन्हें कुचल देगी। NEET लीक की जांच पारदर्शी तरीके से हो और दोषियों को सजा मिले, यह जरूरी है। लेकिन साथ ही, छात्रों को भड़काने वालों की पोल खोलनी भी उतनी ही जरूरी है। CJP का यह डेटा ब्रिच उनके पूरे अभियान की नाकामी को उजागर करता है।

