Default Image

Months format

View all

Load More

Related Posts Widget

Article Navigation

Contact Us Form

404

Sorry, the page you were looking for in this blog does not exist. Back Home

Ads Area

छत्तीसगढ़ में मदरसा बोर्ड बंद करने की मांग, वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को भेजा पत्र।

छत्तीसगढ़ में वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर मदरसा बोर्ड को पूरी तरह समाप्त करने की मांग की है। उन्होंने सुझाव दिया है कि मदरसा बोर्ड की जगह एक नया अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण गठित किया जाए, ताकि मुस्लिम बच्चों को केवल धार्मिक शिक्षा नहीं, बल्कि आधुनिक, कंप्यूटर और व्यावसायिक शिक्षा भी मिल सके।


डॉ. सलीम राज का कहना है कि वर्तमान मदरसा व्यवस्था में पढ़ने वाले अधिकांश छात्र सिर्फ मौलाना या मौलवी बनकर रह जा रहे हैं। मजहबी तालीम के साथ-साथ वर्तमान समय की जरूरतों के अनुरूप विषयों को शामिल नहीं किया जा रहा है, जिससे इन बच्चों के भविष्य के अवसर बेहद सीमित हो गए हैं। राज्य सरकार हर साल मदरसों को भारी अनुदान देती है, लेकिन इसका असली लाभ अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों तक नहीं पहुंच पा रहा है।

उत्तराखंड मॉडल का हवाला देते हुए वक्फ चेयरमैन ने कहा कि वहां मदरसा बोर्ड को समाप्त कर सुधार किया गया है। छत्तीसगढ़ सरकार भी इस मॉडल का अध्ययन कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य प्रशासन उत्तराखंड के कानूनी और प्रशासनिक प्रावधानों की जानकारी जुटा रहा है।

यह मांग इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश भर में मदरसों को लेकर लंबे समय से बहस चल रही है। आलोचक कहते हैं कि कई मदरसों में कट्टरता की शिक्षा दी जाती है, जो बच्चों को मुख्यधारा से अलग करती है। डॉ. सलीम राज का पत्र इस दिशा में एक सकारात्मक कदम लगता है, जो मुस्लिम युवाओं को आधुनिक भारत का हिस्सा बनाने की दिशा में काम कर सकता है।

यदि छत्तीसगढ़ सरकार इस मांग को अमल में लाती है तो यह न सिर्फ अल्पसंख्यक शिक्षा को नई दिशा देगा, बल्कि पूरे देश के लिए एक उदाहरण भी बनेगा। शिक्षा का मतलब केवल धार्मिक ज्ञान नहीं, बल्कि रोजगार, विज्ञान और प्रगति भी होना चाहिए। 

अब समय आ गया है कि मदरसों को भी राष्ट्रीय शिक्षा धारा से जोड़ा जाए, ताकि कोई भी बच्चा सिर्फ मौलवी बनने के लिए नहीं, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर या उद्यमी बन सके।