ओडिशा सरकार ने सख्त कार्रवाई करते हुए वरिष्ठ IPS अधिकारी दयाल गंगवार को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कदम ग्रामीण पुलिस (GRP) के कॉन्स्टेबल सौम्य रंजन स्वैन के परिवार द्वारा लगाए गए उत्पीड़न के गंभीर आरोपों की प्रारंभिक जांच के बाद उठाया गया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के निर्देश पर यह निलंबन हुआ है।
जानकारी के अनुसार, जब दयाल गंगवार GRP में एडीजी के पद पर थे, तब उन्होंने कॉन्स्टेबल सौम्य रंजन को अपनी सरकारी ड्यूटी के बजाय निजी कामों में लगाया था। परिवार का आरोप है कि अधिकारी कॉन्स्टेबल से रोजाना घंटों तक मालिश करवाते थे, जिम में व्यायाम करवाते थे और महंगे सप्लीमेंट्स खरीदने के लिए मजबूर करते थे। इस लगातार उत्पीड़न के कारण सौम्य रंजन भारी मानसिक तनाव में चला गया था।
बता दें कि 7 मई 2026 को सौम्य रंजन स्वैन एक सड़क दुर्घटना का शिकार हुए थे, जिसके बाद भीड़ ने उन्हें पीट-पीटकर मार डाला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण गंभीर चोटें और दिमाग में आंतरिक रक्तस्राव बताया गया। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि IPS गंगवार का निलंबन इस मॉब लिंचिंग से सीधे जुड़ा नहीं है, बल्कि कॉन्स्टेबल के साथ किए गए उत्पीड़न के मामले से संबंधित है। मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है।
यह घटना पुलिस विभाग में पदाधिकारियों और कर्मचारियों के बीच व्यावसायिक संबंधों और शक्ति के दुरुपयोग पर सवाल उठाती है। IPS अधिकारी जैसे उच्च पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा अधीनस्थ कर्मचारी का इस तरह शोषण न केवल अनैतिक है, बल्कि कानून के शासन को भी चुनौती देता है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है ताकि पुलिस बल में अनुशासन और नैतिकता बनी रहे।

