भारतीय सेना ने 16 जून 2026 को ‘आर्मी यूनिफॉर्म्स-2026’ नामक 174 पेज का नया मैनुअल जारी कर ऐतिहासिक कदम उठाया है। इस मैनुअल के जरिए ब्रिटिश काल की पुरानी रीति-रिवाजों को पूरी तरह समाप्त करते हुए सेना को मजबूत भारतीय पहचान दी गई है। औपनिवेशिक प्रतीकों को हटाकर स्वदेशी परंपराओं को प्राथमिकता दी गई है। यह बदलाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘भारतीय मूल्यों’ को सेना में स्थापित करने के विजन का हिस्सा है।
आधिकारिक कार्यक्रमों में अब वेस्टर्न लाउंज सूट और टाई की जगह ‘बंदी जैकेट’ पहनने की अनुमति दी गई है। सेरेमोनियल पाउच बेल्ट को हटा दिया गया है। परेड के दौरान रिव्यूइंग अधिकारियों के लिए तलवार ले जाना अब वैकल्पिक है। ‘रॉयल’ जैसे ब्रिटिश युग के शब्दों को पूरी तरह हटा दिया गया है।
सर्दियों की ड्रेस में बड़ा बदलाव आया है। पुरानी ड्रेस 3A (ऊनी स्वेटर) को हटाकर नई ‘ड्रेस 3B’ लागू की गई है, जिसमें बैटल जैकेट, अंगोला शर्ट और बेरे कैप शामिल हैं। यह बदलाव जून 2029 तक पूरी तरह लागू हो जाएगा। कॉम्बैट यूनिफॉर्म में भी नया 7A और 7B पैटर्न जोड़ा गया है।
महिलाओं के यूनिफॉर्म में बदलाव:
महिला अधिकारियों के लिए सफेद साड़ी, कुर्ता-सलवार या टखनों तक की स्ट्रेट पैंट की अनुमति दी गई है। लेकिन बिना आस्तीन वाले कुर्ते, पलाजो या कैजुअल कपड़ों पर सख्ती से रोक लगाई गई है। मेकअप, लिपस्टिक, रंगीन नेल पॉलिश, बिंदी और नोज पिन पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। सिंदूर लगाने की छूट रहेगी।
सख्त नियम:
टैटू, पियर्सिंग और ब्रेसलेट पर पूरी तरह रोक। मूँछों की लंबाई 12 सेंटीमीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। यूनिफॉर्म में परफ्यूम की मनाही, सिर्फ आफ्टर-शेव लोशन की इजाजत। धार्मिक प्रतीकों पर सख्ती, लेकिन कलावा और सिखों की पारंपरिक चीजों को छूट।
क्यों जरूरी था यह बदलाव?
आजादी के बाद भी सेना में ब्रिटिश परंपराएं बनी रही थीं। प्रधानमंत्री मोदी के निर्देश पर सेना अब पूर्ण स्वदेशीकरण की ओर बढ़ रही है। यह मैनुअल सेना को आधुनिक, व्यावहारिक और भारतीय संस्कृति से जोड़ने वाला बड़ा कदम है। तीनों सेनाओं में एकरूपता भी आएगी।
यह बदलाव न सिर्फ यूनिफॉर्म का है, बल्कि राष्ट्र की आत्मसम्मान और स्वाभिमान का प्रतीक है। हिंदू राष्ट्रवादियों और देशवासियों ने इस कदम का स्वागत किया है।

