लखनऊ के अलीगंज इलाके में 22 जून 2026 को एक कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग ने पूरे उत्तर प्रदेश को झकझोर दिया। इस हादसे में 15 युवा छात्रों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए। ज्यादातर मृतक 16 से 30 वर्ष के बीच के थे, जो एनिमेशन और ग्राफिक्स की कोचिंग ले रहे थे। आग की चपेट में आने से छात्रों की मौत मुख्य रूप से धुएं से दम घुटने के कारण हुई। कई छात्र ऊपरी मंजिलों से कूदकर बचने की कोशिश करते दिखे। यह घटना सुरक्षा मानकों की घोर लापरवाही का दर्दनाक उदाहरण बन गई है।
घटना के तुरंत बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपना कार्यक्रम बदलकर घटनास्थल का दौरा किया। उन्होंने घायलों से अस्पताल में मुलाकात की और मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की। सीएम योगी ने उच्चस्तरीय SIT जांच के आदेश दिए, जिसे 7 दिनों में रिपोर्ट सौंपनी है। पुलिस ने भवन मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, गेमिंग जोन संचालक तुषांक कृष्ण जायसवाल, पेट क्लीनिक संचालक रामकृष्ण उपाध्याय और सुरेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। लखनऊ विकास प्राधिकरण ने 2016-19 के बीच के 19 अधिकारियों की सूची SIT को सौंपी है, जिन पर अवैध निर्माण को नजरअंदाज करने के आरोप हैं।
जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए। कोचिंग सेंटर में फायर NOC नहीं था, भवन का नक्शा स्वीकृत नहीं था, बेसमेंट में क्लासरूम बनाए गए थे, आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) का अभाव था, अग्निशामक यंत्र, स्मोक डिटेक्टर और फायर अलार्म तक नहीं लगे थे। डिजिटल लॉक वाली एंट्री और अन्य उल्लंघनों ने बचाव कार्य को और मुश्किल बना दिया। मुख्यमंत्री योगी ने इसे पूरे प्रदेश के लिए चेतावनी बताया और मिशन मोड में फायर सेफ्टी ऑडिट शुरू करने के निर्देश दिए।
CM योगी के सख्त निर्देश पर पूरे UP में कोचिंग संस्थानों, हॉस्टलों, अस्पतालों और व्यावसायिक भवनों की जांच तेज कर दी गई। अब तक 100 से अधिक कोचिंग सेंटर सील किए जा चुके हैं। प्रयागराज में 97 पंजीकृत संस्थानों में सिर्फ 15 के पास फायर NOC मिला, खान सर के सेंटर समेत कई बड़े संस्थान सील हो गए। कानपुर के काकादेव में 30 से ज्यादा, वाराणसी में 8 (एलेन और आकाश जैसे ब्रांड शामिल), नोएडा, मिर्जापुर, गाजियाबाद आदि में भी ताबड़तोड़ सीलिंग हुई।
सरकार के नए नियम साफ हैं—बेसमेंट में किसी भी कमर्शियल गतिविधि (कोचिंग, नर्सिंग होम आदि) की मनाही। बेसमेंट केवल पार्किंग के लिए इस्तेमाल हो सकता है। आवासीय भवनों में व्यावसायिक उपयोग नहीं चलेगा। भवन का उपयोग केवल स्वीकृत उद्देश्य के लिए ही होगा। हाईकोर्ट के सुरक्षा निर्देशों का भी पालन अनिवार्य किया गया है।
यह अग्निकांड शिक्षा जगत और प्रशासन दोनों के लिए सबक है। छात्रों की सुरक्षा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। योगी सरकार की यह कार्रवाई भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने की दिशा में मजबूत कदम है। माता-पिता और छात्रों को भी सतर्क रहना चाहिए—केवल उन संस्थानों में दाखिला लें जहां पूर्ण सुरक्षा मानक पूरे होते हों।
लापरवाही की इस संस्कृति को खत्म करने का समय आ गया है। योगी आदित्यनाथ की सरकार ने साबित किया कि जनहित में सख्ती से काम लिया जा सकता है। SIT की रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई से पता चलेगा कि दोषियों को कितनी सजा मिलती है। उम्मीद है कि यह हादसा UP को सुरक्षित शिक्षा हब बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।

