बरेलवी मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी का नया फ़तवा सुनिए—
👉 "मुसलमान मोदी-योगी पर बनी फ़िल्में न देखें, ये शरीयत में नाजायज और हराम है।"
मतलब अब हिंदुस्तान में कौन-सी फ़िल्म देखनी है, कौन-सी नहीं, ये भी ये मौलाना तय करेंगे? 🤔
यह वही मानसिकता है जिसने तालिबान जैसे कट्टर आतंकी संगठनों को जन्म दिया। जब भारत के प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री पर बनी फ़िल्म देखना गुनाह बताया जाए तो साफ़ है कि ये लोग लोकतंत्र, संविधान और आज़ादी की खुली अवहेलना कर रहे हैं।
भारत में हर नागरिक को फ़िल्म देखने, सोचने और बोलने की आज़ादी है। किसी मौलाना या कट्टरपंथी को ये हक़ नहीं कि वह हमारे नेताओं का अपमान करे और समाज को ज़हर से भरे फ़तवों में उलझाए।
📢 सवाल उठता है – ऐसी जहरीली सोच फैलाने वालों पर सरकार कार्रवाई क्यों नहीं करती?
कब तक हिंदुओं और राष्ट्रवादी नेताओं के ख़िलाफ़ इस तरह की नफ़रत फैलाई जाएगी?
🔥 अब वक्त आ गया है कि ऐसे कट्टर फ़तवा गैंग को सख़्ती से सबक सिखाया जाए। मोदी-योगी आज करोड़ों भारतीयों की उम्मीद और आस्था हैं, और उनके अपमान को कोई भी देशभक्त बर्दाश्त नहीं करेगा।

