नेपाल की राजनीति एक बार फिर उथल-पुथल में है। हाल ही में जनरेशन Z के उग्र विरोध प्रदर्शनों के बाद सत्ता से बाहर हुए नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने एक बार फिर भारत पर आरोपों की बौछार कर दी है। हर बार की तरह इस बार भी उन्होंने अपनी नाकामियों और जनता के गुस्से को छिपाने के लिए भारत को निशाना बनाया।
ओली ने प्रेस से बात करते हुए दावा किया कि अपने कार्यकाल में उन्होंने ऐसा इंतज़ाम किया कि “किसी भी ताकत को नेपाल पर नाकेबंदी थोपने का मौका नहीं दिया।” यह बयान सीधे भारत पर निशाना साधते हुए दिया गया। गौरतलब है कि 2015 की भारत-नेपाल सीमा पर हुई घटनाओं को लेकर ओली हमेशा से भारत को दोषी ठहराते रहे हैं और इसी मुद्दे को हवा देकर उन्होंने अपनी राजनीति को ज़िंदा रखने की कोशिश की।
इसके अलावा ओली ने यह भी आरोप लगाया कि GenZ प्रदर्शनों में बाहरी ताकतों की घुसपैठ हुई थी। यह आरोप भी अप्रत्यक्ष रूप से भारत की ओर इशारा करता है। हालांकि, नेपाल के युवाओं का आक्रोश इस बात का प्रमाण है कि यह आंदोलन पूरी तरह से घरेलू असंतोष का परिणाम है, जो भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी और शासन की विफलताओं से उपजा है। लेकिन ओली इन सच्चाइयों को स्वीकार करने की बजाय आरोप-प्रत्यारोप में व्यस्त हैं।
सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि ओली ने यह दावा किया कि उनकी सरकार ने “कभी भी प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश नहीं दिया।” जबकि वास्तविकता यह है कि उनके शासनकाल में कई बार पुलिस की गोलीबारी और बल प्रयोग की खबरें सामने आईं, जिससे जनता का गुस्सा और भड़का। जनता भली-भांति जानती है कि ओली की सरकार ने आंदोलनकारियों के प्रति दमनकारी रवैया अपनाया था।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि ओली का यह बयानबाज़ी भरा रवैया सिर्फ और सिर्फ अपनी नाकामियों को ढकने का तरीका है। जिस तरह भारत को बार-बार दोषी ठहराकर वे अपनी राजनीति को बचाने की कोशिश करते हैं, वह नेपाल की जनता को गुमराह करने की कोशिश से ज़्यादा कुछ नहीं। भारत-नेपाल संबंध हमेशा से सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जुड़ाव पर आधारित रहे हैं, लेकिन ओली का भारत-विरोधी एजेंडा इस रिश्ते को कमजोर करने का काम करता है।
नेपाल की युवा पीढ़ी, खासकर GenZ, अब ओली के इन झूठे बहानों को समझ चुकी है। यही कारण है कि वे सड़कों पर उतरकर अपने अधिकारों और बेहतर भविष्य की मांग कर रहे हैं। वे जान चुके हैं कि नेपाल की समस्याओं का समाधान भारत को दोषी ठहराने में नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी और राजनीतिक अस्थिरता को खत्म करने में है।
कुल मिलाकर, ओली का भारत-विरोध अब एक पुराना और घिसा-पिटा हथकंडा बन चुका है। हर बार जब वे राजनीतिक संकट में घिरते हैं, तो भारत पर आरोप लगाना शुरू कर देते हैं। लेकिन इस बार जनता की नाराज़गी इतनी गहरी है कि केवल आरोप-प्रत्यारोप से हालात नहीं सुधरने वाले। नेपाल के लोग और खासकर युवा अब वास्तविक बदलाव चाहते हैं, न कि खोखले नारों और झूठे वादों का खेल।
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