सारांश, नेपाल के धनुषा जिले में एक चर्च द्वारा गरीब हिन्दुओं को धर्मांतरण के लिए लालच देने का मामला सामने आया है। हिन्दू सम्राट सेना ने चर्च के बाहर प्रदर्शन किया और पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने चर्च को सील कर दिया और मुख्य आरोपित भरत महतो की जांच शुरू कर दी है। महतो पहले हिन्दू था, लेकिन ईसाई धर्म अपना चुका है। चर्च की गतिविधियों से स्थानीय लोगों में आक्रोश है और प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
1. धर्मांतरण का आरोप और प्रदर्शन : नेपाल के धनुषा जिले के शहीद नगर नगरपालिका में एक चर्च द्वारा गरीब हिन्दुओं को धर्मांतरण के लिए लालच देने का आरोप लगा है। इस वार्ड में गरीब और मध्यमवर्गीय लोग अधिक संख्या में रहते हैं, जिनमें दलित समुदाय के लोग प्रमुख हैं। हिन्दू सम्राट सेना के सदस्यों ने शनिवार (31 अगस्त, 2024) को चर्च के सामने प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि चर्च द्वारा गरीब हिन्दुओं को लालच देकर ईसाई बनाया जा रहा है। हालात तनावपूर्ण होने पर पुलिस बल मौके पर पहुंचा और चर्च पर ताला लगा दिया गया।
2. भरत महतो और चर्च का संचालन : मुख्य आरोपित भरत महतो पहले हिन्दू था, लेकिन बाद में ईसाई धर्म अपना लिया। लगभग 5 साल पहले इस वार्ड में चर्च की स्थापना की गई थी और उसके बाद आसपास के गरीब लोगों का वहाँ आना-जाना शुरू हो गया। चर्च का संचालन भरत महतो करता था, और उसी के द्वारा चर्च में गतिविधियाँ आयोजित की जा रही थीं। आरोप है कि वहाँ पर लोगों को धर्मांतरण के लिए प्रलोभन दिया जाता था।
3. हिन्दू सम्राट सेना की भूमिका : नेपाल की हिन्दू सम्राट सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश यादव ने इस मामले पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उनके संगठन को चर्च के अंदर चल रही गतिविधियों की सूचना मिली थी, जहाँ दलित वर्ग के हिन्दुओं को प्रार्थना के बहाने बुलाकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा था। हिन्दू सम्राट सेना ने अपनी जांच के बाद प्रशासन को ज्ञापन सौंपा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। इससे नाराज होकर संगठन ने चर्च के सामने प्रदर्शन किया।
4. चर्च की सीलिंग और प्रशासन की जांच : प्रदर्शन के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुँचे और चर्च के कागजातों की जांच की। जांच के दौरान पता चला कि चर्च बिना किसी वैध कागज के संचालित हो रहा था। इसके बाद चर्च को सील कर दिया गया। हिन्दू सम्राट सेना ने पास्टर भरत महतो के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है। चर्च के अंदर से बाइबिल और अन्य ईसाई साहित्य भी बरामद हुए हैं।
5. स्थानीय आक्रोश और प्रशासन की प्रतिक्रिया : इस घटना ने स्थानीय समुदाय में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। लोग धर्मांतरण की गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। प्रशासन ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है और आरोपियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने का आश्वासन दिया है। यह घटना नेपाल में धार्मिक संतुलन और सामाजिक सद्भाव को लेकर गंभीर चिंताएं उत्पन्न कर रही है।

