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राजस्थान हाई कोर्ट का फैसला: दो से अधिक संतान वाले सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन पर रोक

सारांशराजस्थान हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में दो से अधिक संतान वाले सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन पर रोक लगा दी है। यह फैसला तब आया जब 2023 में कांग्रेस सरकार ने ऐसे कर्मचारियों को प्रमोशन देने की अनुमति दी थी, जिसे कोर्ट ने असंवैधानिक करार दिया। इस फैसले से हजारों सरकारी कर्मचारी प्रभावित होंगे। कोर्ट के इस फैसले ने सरकारी सेवाओं में परिवार नियोजन के नियमों के महत्व और संवैधानिकता को फिर से केंद्र में ला दिया है, और यह बहस छेड़ दी है कि इस प्रकार के नियमों का पालन किस हद तक होना चाहिए।

1. सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन पर रोक : राजस्थान हाई कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है जिसमें दो से अधिक संतान वाले सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन पर रोक लगा दी गई है। यह फैसला तब आया जब 2023 में कांग्रेस की तत्कालीन राज्य सरकार ने ऐसे कर्मचारियों के प्रमोशन पर लगी रोक को हटा लिया था और उन्हें बैक डेट से प्रमोशन देने का आदेश दिया था। इस फैसले का व्यापक असर राज्य के हजारों सरकारी कर्मचारियों पर पड़ेगा, जो इस नीति से प्रभावित हो रहे हैं और इससे उनके करियर में बाधा उत्पन्न हो सकती है।

2. कोर्ट का आदेश और उसका प्रभाव : राजस्थान हाई कोर्ट की खंडपीठ, जिसमें जस्टिस पंकज भंडारी और जस्टिस विनोद कुमार भारवानी शामिल थे, ने यह आदेश जारी किया है। कोर्ट ने यह फैसला संतोष कुमार और अन्य लोगों द्वारा दायर याचिकाओं के आधार पर सुनाया, जिसमें उन्होंने तर्क दिया था कि सरकार की नई अधिसूचना के कारण उनकी वरिष्ठता सूची में बदलाव आ गया है। हाई कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए राज्य सरकार की अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिससे प्रभावित कर्मचारियों को न्याय मिलने की संभावना बनी है।

3. बैक डेट प्रमोशन और वरिष्ठता विवाद : याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में यह भी तर्क दिया कि इन कर्मचारियों को बैक डेट से प्रमोशन देने के कारण उनकी वरिष्ठता सूची में बदलाव आ गया है। इससे उनकी पदोन्नति प्रभावित हो रही है और वे वरिष्ठता सूची में नीचे चले गए हैं। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद, हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिससे याचिकाकर्ताओं को राहत मिली है और यह मामला अब न्यायिक प्रक्रिया में आगे बढ़ेगा।

4. परिवार नियोजन नीति का इतिहास : राजस्थान सरकार ने 2001 में एक अधिसूचना जारी की थी, जिसमें कहा गया था कि 1 जून 2002 के बाद तीसरा बच्चा होने पर सरकारी कर्मचारियों को पांच साल के लिए प्रमोशन से वंचित कर दिया जाएगा। बाद में, 2017 में, सरकार ने इस अवधि को घटाकर तीन साल कर दिया। इस नियम का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों को परिवार नियोजन के प्रति जागरूक करना और छोटे परिवार की अवधारणा को बढ़ावा देना था। यह नीति अब भी कई सरकारी नियमावली में लागू है और इसे लेकर बहस जारी है।

5. 2023 की अधिसूचना और उसकी प्रतिक्रिया : 16 मार्च 2023 को, राजस्थान के कार्मिक विभाग ने एक नई अधिसूचना जारी की थी, जिसमें कहा गया था कि जिन कर्मचारियों की पदोन्नति दो से अधिक बच्चों के होने के कारण रोकी गई थी, उन्हें अब बैक डेट से प्रमोशन का लाभ दिया जाएगा। इस अधिसूचना के आधार पर, राज्य के करीब 125 विभागों में रिव्यू डीपीसी के माध्यम से कर्मचारियों को प्रमोशन का लाभ दिया जा रहा था। इस फैसले ने राज्य के प्रशासनिक ढांचे में हलचल मचा दी और कई कर्मचारियों ने इसे चुनौती दी।

6. याचिकाकर्ताओं के तर्क : याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में तर्क दिया कि राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी करके दो से अधिक बच्चों वाले कर्मचारियों को प्रमोशन से वंचित कर दिया था। अब उन्हीं कर्मचारियों को बैक डेट से प्रमोशन देना कानून सम्मत नहीं है। बारां और झालावाड़ के पुलिसकर्मियों ने इस अधिसूचना को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह कदम सरकारी सेवाओं में परिवार नियोजन के नियमों का उल्लंघन करता है और यह असंवैधानिक है।

7. सुप्रीम कोर्ट का दृष्टिकोण : राजस्थान सरकार की ‘टू चाइल्ड पॉलिसी’ को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई थी। फरवरी 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दो से ज्यादा बच्चे होने पर सरकारी नौकरी देने से मना करना भेदभावपूर्ण नहीं है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि इस नियम का मकसद परिवार नियोजन को बढ़ावा देना है और यह नियम सरकारी कर्मचारियों पर लागू होना चाहिए। इस फैसले ने राज्य सरकार की नीति को संवैधानिक करार दिया और इसे लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

8. अन्य राज्यों की नीति : महाराष्ट्र सहित कई अन्य राज्यों में भी टू-चाइल्ड पॉलिसी को लेकर कई नियम लागू हैं। 2001 के सरकारी रिजॉल्यूशन में कहा गया है कि अगर किसी कर्मचारी के दो से ज्यादा बच्चे हैं और सेवा के दौरान उसकी मौत हो जाती है, तो परिवार के किसी भी व्यक्ति को अनुकंपा पर नियुक्ति नहीं दी जाएगी। 2005 से लागू सिविल रूल्स में यह भी प्रावधान है कि दो से ज्यादा बच्चे होने पर सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य होंगे। इन नीतियों का उद्देश्य परिवार नियोजन को बढ़ावा देना और छोटे परिवार की अवधारणा को प्रोत्साहित करना है।