'हमारे बारह' फिल्म का पहला टीजर रिलीज होते ही विवादों में घिर गया है। मुस्लिम महिलाओं की स्थिति पर प्रकाश डालने वाली इस फिल्म के खिलाफ इस्लामी कट्टरपंथियों ने गुस्सा जाहिर किया है और डायरेक्टर तथा कलाकारों को धमकियाँ दी हैं।
धमकियों की शुरुआत :
फिल्म 'हमारे बारह' के टीजर के रिलीज के बाद डायरेक्टर कमल चंद्रा, अभिनेता अन्नू कपूर और अभिनेत्री अदिति धीमन को जान से मारने की धमकियाँ मिल रही हैं। कट्टरपंथियों ने सोशल मीडिया पर 'सिर तन से जुदा' की धमकियाँ दी हैं।
धमकी देने वालों का खुलासा :
एक्स यूजर Error 404 ने ऐसे लोगों की एक लिस्ट पोस्ट की है जो धमकियाँ दे रहे हैं। इस यूजर ने मुंबई पुलिस का ध्यान इस मामले की ओर दिलाते हुए एक्शन लेने की मांग की है। जानकारी के मुताबिक, धमकी देने वालों में 'तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान' के समर्थक भी शामिल हैं।
कट्टरपंथियों की रणनीति :
ISIS द्वारा 'सिर तन से जुदा' करने की वीडियो को शेयर करके डायरेक्टर और मेकर्स को डराया जा रहा है। इसके अलावा, कुछ कट्टरपंथियों का संबंध पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया की ईकाई सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया से भी है। ये लोग सोशल मीडिया पर मुस्लिमों को उकसा रहे हैं कि वे अन्नू कपूर और फिल्म से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ एक्शन लें।
साइबर अटैक और अन्य धमकियाँ :
फिल्म के मेकर का फोन नंबर, ईमेल, आईपी एड्रेस, मैक अड्रेस और टावर की डिटेल ऑनलाइन लीक कर दी गई हैं। व्हॉट्सएप पर भी मेकर को मारने की धमकियाँ दी जा रही हैं। इस्लामी नारे और बंदूक की आवाज वाली वीडियो भी शेयर की जा रही हैं, जिनमें डायरेक्टर और एक्टर्स का चेहरा लगाकर डराने का प्रयास किया जा रहा है।
फिल्म का विवादास्पद विषय :
फिल्म 'हमारे बारह' में दिखाया गया है कि कैसे कट्टरपंथी मौलानाओं के प्रभाव में आकर मुस्लिम महिलाओं पर अत्याचार होता है। फिल्म में अन्नू कपूर, अश्विनी कालसेकर और मनोज जोशी मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म का प्रीमियर 77वे कान्स फिल्म समारोह में हुआ और इसे 7 जून को रिलीज किया जाएगा।
नाम परिवर्तन और फिल्म का उद्देश्य :
पहले इस फिल्म का नाम ‘हम दो हमारे बारह’ था, जिसे सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन के कहने पर ‘हमारे बारह’ कर दिया गया। फिल्म का उद्देश्य मुस्लिम महिलाओं की स्थिति को दिखाना और समाज में सुधार लाने की कोशिश करना है।
इस पूरे घटनाक्रम ने फिल्म इंडस्ट्री और समाज में एक गंभीर बहस छेड़ दी है कि कला और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर इस प्रकार के कट्टरपंथी हमले किस हद तक जायज हैं और इसके खिलाफ क्या कदम उठाए जाने चाहिए।

