ताइवान यह नाम 2020 से 2021 में बहुत प्रचलित रहा ।ताइवान पूर्वी एशिया में स्थित एक द्वीपों से निर्मित देश है। पर कई देश इसे स्वतंत्र देश ना मानकर इसे चीनी गणराज्य मानते हैं। इन देशों में कई नाम ऐसे हैं जो ताइवान को पर्दे के पीछे से सपोर्ट करते हैं, जैसे भारत ,भारत के ताइवान के साथ कोई औपचारिक राजनैतिक संबंध नहीं है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच व्यापार एक अस्थाई है,लेकिन एक मजबूत पुल के समान है ।
हाल ही में खबर आई थी कि भारत और ताइवान के बीच फ्री ट्रेड वार्ता का आगाज हो चुका है। खबरें यह भी आई कि ताइवान की कंपनियां और भारत की टाटा कंपनी भारत में सेमीकंडक्टर बनाने को लेकर चर्चा कर रही हैं। जिससे भारत कंडक्टर के मामले में आत्मनिर्भर होगा और कहीं ना कहीं चीन पर से निर्भरता कम होगी और वही बात करें अमेरिका की तो अमेरिक का भी ताइवान को एक संप्रभु देश नहीं मानता इसके बावजूद अमेरिका ने ताइवान के साथ एक सकारात्मक संबंध बनाए रखें हैं। जिसमें सैन्य सहायता की पेशकश भी शामिल है।
अभी कुछ समय पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि चीन ने अगर ताइवान पर हमला किया तो अमेरिका ताइवान की रक्षा करेगा। इसके बाद चीन की बौखलाहट दुनिया के सामने आई। ताइवान का भारत के साथ व्यापार अमेरिका के साथ और भी अन्य देशों के साथ व्यापार स्थापित करना ताइवान की एक कूटनीतिक चाल है। जिससे वे इन देशों को एक हद तक मजबूर करें कि वह जमीन के भूखे देश चीन से उसे बचा सके
ताइवान को आखिर किससे बचाना है
ताइवान को चीन की विस्तार वादी नीति से बचाना किसी एक या दो देश के हित मैं नहीं बल्कि यह एक वैश्विक हित का मामला है।
चीन की विस्तार वादी नीति केवल ताइवान तक ही सीमित नहीं है वर्तमान विस्तार वाद की ओर नजर डालें तो तिब्बत का विलय एक प्रमुख घटना थी। तिब्बत पर चीनी आक्रमण 1950 से 1959 तक की घटनाओं की एक श्रंखला थी जिसके द्वारा चीन ने तिब्बत पर नियंत्रण हासिल किया।
इसी के साथ-साथ अगर बात करें तिब्बत की पांच उंगलियों की तिब्बत की पांच उंगलियां एक प्रतिपादित चीनी रणनीति है, जिसके तहत लद्दाख नेपाल सिक्किम भूटान अरुणाचल प्रदेश को चीन से जोड़ा जाएगा इस रणनीति के जनक माओत्से तुंग थे।

