जानिए स्टैचू ऑफ यूनिटी पर क्या कहा सरदार पटेल के परिवार ने.


नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका भारत आइडिया में, दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं स्टैचू ऑफ यूनिटी के बारे में जिस पर हर व्यक्ति अपनी अपनी प्रतिक्रिया दे रहा है लेकिन क्या आपको पता है सरदार पटेल के परिवार ने भाजपा के इस कदम पर क्या कहा.

जानिए स्टैचू ऑफ यूनिटी पर क्या कहा सरदार पटेल के परिवार ने.

क्या कहा सरदार पटेल के पोते ने:
हम आपको बताना चाहेंगे कि सरदार वल्लभ भाई पटेल के परिवार के सदस्यों ने स्टैचू ऑफ यूनिटी के लौह पुरुष को यथोचित श्रद्धांजलि करार देते हुए कहा कि इससे युवा पीढ़ी को उनके जीवन के बारे में जानने में मदद मिलेगी साथ ही साथ उनके परिवार ने यह भी कहा कि ये श्रद्धांजलि सरदार वल्लभ भाई पटेल को बहुत पहले ही मिल जानी चाहिए थी जो शायद नहीं मिली. सरदार वल्लभ भाई पटेल के बड़े भाई शोभा भाई पटेल के पोते धीरूभाई पटेल ने कहा की सरदार पटेल के लिए कांग्रेस ने ऐसा कुछ भी नहीं किया लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने सरदार वल्लभ भाई पटेल को वो सम्मान दिया जिसके वह हकदार थे.


सरदार पटेल के परिवार के अन्य 35 सदस्य भी हुए शामिल:
सरदार पटेल की 143 वी जयंती के अवसर पर बुधवार को सुबह नर्मदा नदी के तट पर 182 मीटर लंबी प्रतिमा के अनावरण कार्यक्रम में धीरुभाई जिनकी उम्र तकरीबन 91 वर्ष है वह विशेष तौर पर आमंत्रित थे. धीरूभाई सरदार वल्लभ भाई पटेल के बड़े भाई शोभा भाई पटेल के होते हैं, धीरूभाई पटेल के अलावा इस कार्यक्रम में सरदार वल्लभ भाई पटेल के परिवार के 35 अन्य सदस्यों ने भी हिस्सा लिया .


देश को एक करने में योगदान रहा था सरदार पटेल का:
आपको जानकर हैरानी होगी कि स्वतंत्र भारत के पहले गृह मंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल को भारत संघ में 550 रजवाड़ों को शामिल करने का श्रेय दिया जाता है जिसमें जूनागढ़ और हैदराबाद रजवाड़े विशेष तौर पर शामिल है क्योंकि यह कुछ रजवाड़े ऐसे थे जो खुद का आजाद देश बनाना चाहते थे. सरदार वल्लभ भाई पटेल के परिवार वालों के अनुसार कहा गया कि यह काम काफी पहले कर दिया जाना चाहिए था जो कि नहीं हुआ. परिवार वालों के अनुसार प्रतिमा एकता और राष्ट्र को एक करने में सरदार की भूमिका का संदेश प्रसारित करेगी.इस कार्यक्रम में सरदार वल्लभभाई पटेल स्मारक ट्रस्ट के संस्थापक सचिव हसमुख पटेल भी विशेष रूप से आमंत्रित थे उन्होंने कहा कि सरदार की प्रतिमा बनाना एक अच्छा निर्णय रहा.


संपादक : विशाल कुमार सिंह

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