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    MeToo के आरोप मैं पहली सुसाइड की केस अाई.




    नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका भारत आइडिया में, तो दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं MeToo के बारे में जिसमें एक व्यक्ति ने चार महिलाओं से उत्पीड़न के आरोप के बाद सुसाइड कर लिया है और व्यक्ति कोई और नहीं दीपिका पादुकोण का एक्स मैनेजर है.

    MeToo के आरोप मैं पहली सुसाइड की केस अाई.

    क्या है मामला :
    जी हां दोस्तों आपने सही सुना बॉलीवुड एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण के पूर्व मैनेजर रहे कवान एंटरटेनमेंट के को- फाउंडर अनिर्बान दास ब्लाह  पर चार महिलाओं ने यौन शोषण का आरोप लगाया था, जिसके बाद शुक्रवार को मुंबई के एक ब्रिज से अनिर्बन दास ब्लाह को आत्महत्या की कोशिश करते पकड़ा गया. आपको बता दें कि इन आरोपों के बाद अनिर्बन को क्वान एंटरटेनमेंट से बाहर कर दिया गया था जिसके बाद अनिर्वाण ने खुद खुशी की कोशिश की और उसी दौरान वासी ट्रैफिक पुलिस ने अनिर्बन दास ब्लाह आत्महत्या की कोशिश करते पकड़ा.




    कब हुई घटना :
    मिल रही जानकारी के अनुसार यह घटना देर रात 12:30 बजे घटित हुई, अनिवार्य खुदखुशी के लिए मुंबई के पास वासी में स्थित पुराने ब्रिज से चुना था लेकीन वासी में पेट्रोलिंग कर रही पुलिस ने अनिर्वाण को ऐसा करने से रोक लिया और अपने हिरासत में ले लिया है जिसके बाद पुलिस ने अनिर्बन के परिवार वालों को बुलाकर अनिर्बन को उनके परिवार वालों को सौंप दिया .




    खुदखुशी से पहले एक सुसाइड नोट भी छोरा :
    अनिर्बन खुदखुशी करने से पहले एक सुसाइड लेटर लिखकर घर पर भी छोड़ दिया था, जिसमें उन्होंने लिखा था कि आपको पता होना चाहिए कि जो कहानियां आप सुनते हैं वह सच से भी ज्यादा गंदी हो सकती हैं लेकिन जो कुछ भी सच है उसने मुझे मेरी ही आंखों में राक्षस बना दिया है, जिसके बाद मैंने खुद को खत्म करने का मन बनाया है और मेरी बॉडी वासी क्रिक के पास कहीं मिलेगी जिसमें आईडेंटिफिकेशन के लिए मेरा लाइसेंस और मेरा टैटू भी है. मैंने ब्लू रंग की जींस और टीशर्ट पहन रखी है, मेरे अंदर का राक्षस मेरे अंदर के दूसरे इंसान से बहुत पहले जीत गया है अब यह वक्त इसे एक बार और हमेशा के लिए मार दिया जाए.


    MeToo  का लोग उठा रहे है गलत फायदा :
    बहरहाल जो भी हो लेकिन देश की महिलाएं अपने विरूद्ध हुए उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठा रही हैं ताकि उनको इंसाफ मिल सके वहीं कुछ महिलाएं रातों रात शोहरत पाने के लिए इसका गलत इस्तेमाल भी कर रही हैं.

    संपादक : विशाल कुमार सिंह