सरदार वल्लभ भाई पटेल की पूर्ण जीवनी.



नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका भारत आइडिया में, तो दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं भारत के लौह पुरुष के बारे में जिन्होंने अपना पूरा जीवन भारत माता के लिए समर्पित कर दिया तथा आजादी के बाद देश को एक सूत्र में बांधने का सबसे महत्वपूर्ण योगदान दिया.

सरदार वल्लभ भाई पटेल की पूर्ण जीवनी.

सरदार वल्लभभाई पटेल स्वतंत्र भारत के पहले उप प्रधानमंत्री के रुप में उन्होंने भारतीय संघ के साथ से सैकड़ो रियासतों का विलय किया, आपको जानकर हैरानी होगी कि अगर सरदार वल्लभभाई पटेल ना होते तो हमारा देश ना जाने कितने हिस्सों में बटा होता. सरदार वल्लभभाई पटेल पेशे से एक वकील थे और अगर वह चाहते तो आराम से बैठ कर हजारों की तनख्वाह के साथ एक आराम की जिंदगी व्यतीत कर सकते थे लेकिन उन्होंने आराम की जिंदगी छोड़ देश को अपना जीवन समर्पित कर दिया.किसानों के नेता सरदार वल्लभभाई पटेल ने अंग्रेजो को घुटने टेकने पर मजबूर कर भारत को स्वतंत्र कराने में एक अहम भूमिका निभाई शायद इसीलिए उन्हें हम लौह पुरष के नाम से जानते है. बारडोली सत्याग्रह में अपने अमूल्य योगदान के लिए लोगों ने उन्हें सरदार की उपाधि दी, भारत की आजादी के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल भारत के उप-प्रधानमंत्री और भारत को एक बंधन में जोड़ने में सबसे अहम भूमिका निभाई.




सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नाडियाड नाम के एक छोटे से गांव में हुआ था, उनके पिता जव्हेरभाई पटेल एक साधारण एक साधारण किसान तथा माता लाडबाई एक गृहणी थी. सरदार वल्लभभाई पटेल बचपन से ही काफी परिश्रमी थे, इसीलिए उनको जब भी मौका मिलता वो अपने पिता की खेती में सहायता करते थे. सरदार वल्लभभाई पटेल अपनी प्राथमिक शिक्षा पेटलाद की एन.के हाई स्कूल से ली.स्कूल के दिनों से ही सरदार वल्लभभाई पटेल काफी होशियार और विद्वान थे शायद इसीलिए उनके पिता ने आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद उन्हें 1896 में हाई स्कूल परीक्षा पास करने के बाद कॉलेज भेजने का निर्णय लिया लेकिन सरदार वल्लभभाई पटेल कॉलेज जाने से इंकार कर दिया जिसके बाद लगभग तीन वर्षों तक सरदार वल्लभभाई पटेल घर पर ही थे और कठिन मेहनत करके बैरिस्टर उपाधि संपादन की और साथ ही देश सेवा कार्यों में जुट गए.




सरदार वल्लभभाई पटेल गुजरात में ही पले-बढ़े तथा सफलतापूर्वक वकील का परीक्षण लिया बाद में उन्होंने खेडा, बोरसद और बारडोली के किसानों को एकता के सूत्र में बांधकर ब्रिटिश राज्य में पुलिसकर्मीयो द्वारा किए जा रहे अत्याचारों तथा ज़ुल्मो का विरोध अहिंसात्मक तरीके से किया. किसानों का नेता बन अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल फूंकने के साथ ही वह गुजरात के मुख्य स्वतंत्रता सेनानियों में गिने जाने लगे थे.सरदार वल्लभभाई पटेल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में भी अपने पद को विकसित किया तथा 1934 और 1937 के चुनाव में उन्होंने एक पार्टी भी स्थापित की थी और लगातार वे भारत छोड़ो आंदोलन का प्रसार प्रचार करने में लगे रहते थे.भारत के पहले की गृहमंत्री तथा उप-प्रधानमन्त्री के पद पर रहते हुए उन्होंने पंजाब और दिल्ली से आए शरणार्थीयों के लिए देश में शांति का माहौल विकसित किया था.




सरदार वल्लभभाई पटेल भारतीय स्वतंत्रता एक्ट 1947 के तहत देश के सभी राज्य को एक सूत्र में बांधना तथा मजबूत करना चाहते थे, देश के सैन्य शक्ति और जनशक्ति दोनों को विकसित कर देश को एक सूत्र में बांधकर विश्व गुरु बनाना चाहते थे. सरदार वल्लभभाई पटेल के अनुसार आजाद भारत बिल्कुल नया और सुंदर होना चाहिए  जिसके तहत उन्होंने अपने असंख्य योगदान देश की जनता को दिए . सरदार वल्लभभाई पटेल को भारतीय सिविल सर्वेंट का संरक्षक भी कहा जाता है, कहां जाता है कि उन्होंने ही आधुनिक भारत के सर्विस सिस्टम की स्थापना की थी.सरदार वल्लभभाई पटेल एक ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्हें स्वतंत्रता संग्राम के बाद भारत का हर एक व्यक्ति प्रधानमंत्री के रुप में देखना चाहता था लेकिन अंग्रेजों की नीति और महात्मा गांधी जी के निर्णय के कारण भारत के देशवासियों का यह सपना पूरा नहीं हो पाया.




सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रारंभिक जीवन को जानकर हम यह कह सकते हैं कि जन से कोई इंसान महान नहीं होता बल्कि उसके महान कार्य उसको महान बनाते हैं और साइड इसीलिए देश की जनता ने उन्हें आयरन मैन ऑफ इंडिया - लौह पुरुष क्यों उपाधि दी.सरदार वल्लभभाई पटेल ने राष्ट्रीय एकता का इक ऐसा स्वरुप दिखाया था जिसके बारे में उस समय कोई सोच भी नहीं सकता था, आपको जानकर हैरानी होगी कि आजादी के बाद भारत की ऐसी कई रियासते थी खुद का आजाद देश बनाना चाहती थी लेकिन सरदार वल्लभभाई पटेल ने उन सभी रियासतों को एक सूत्र में बांधा और इसीलिए हम उनके जन्मदिवस को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाते हैं.इस दिन को भारत सरकार ने 2014 से मनाना शुरू किया था और आज 2018 का 31 अक्टूबर है जब नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार ने सरदार वल्लभभाई पटेल की 182 मीटर की विश्व की सबसे बड़ी प्रतिमा मां नर्मदा की नदी तट पर स्थापित की है,  जिस का नामकरण स्टेचू ऑफ यूनिटी दिया गया है.




सरदार पटेल के जीवन की महत्वपूर्ण बातें.
  • 1913 में लंदन से बेस्ट की उपाधि ग्रहण कर भारत लौटे.
  • 1916 में लखनऊ में राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में सरदार वल्लभभाई पटेल ने गुजरात का प्रतिनिधित्व लिया.
  • 1917 में अहमदाबाद नगर पालिका में चयनित किए गए.
  • 1917 में खेडा सत्याग्रह न्यू नेता लिया तथा सारा बंदी आंदोलन का भी नेतृत्व किया.
  • 1918 में जून के महीने में किसानों ने विजय उत्सव मनाया तथा गांधी जी को बुलाकर उनके द्वारा सरदार वल्लभभाई पटेल को मान पत्र  उपाधि दिलवाया.
  • 1919 में  रौलेट एक्ट के विरोध में अहमदाबाद में बहुत बड़ा आंदोलन किया .
  • 1920 में महात्मा गांधी ने असहकार आंदोलन शुरु किया इस आंदोलन के साथ सरदार वल्लभभाई पटेल ने अपना पूरा जीवन देश को समर्पण किया तथा महीने की मिलने वाली वकीली की हजारों की तनख्वाह छोड़ देश हित कार्यों में जुट गए .
  • 1921 में गुजरात प्रांतीय कांग्रेस कमेटी का सरदार पटेल को अध्यक्ष चुना गया.
  • 1923 में अंग्रेज सरकार ने तिरंगा पर बंदी का कानून किया, जिसके फलस्वरूप भारतवर्ष के अलग अलग जगहों से हजारों की संख्या में सत्याग्रही नागपुर में इकट्ठा हुए और साढे 3 महीने पूरे जोश के साथ सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में आंदोलन किया .
  • 1928 को बार्डोली में सरदार वल्लभ भाई पटेल ने किसानों के साथ शराबबंदी के लिए आंदोलन शुरू किया.
  • 1931 में कराची में कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन में अध्यक्ष की तौर पर कार्यक्रम का हिस्सा रहे.
  • 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन की वजह से उन्हें जेल जाना पड़ा.
  • 1946 में स्थापना हुए मध्यवर्ती अभिनय मंत्रिमंडल में वह गृह मंत्री चुने गए.
  • 1947 में देश के प्रथम उप-प्रधानमन्त्री तथा देश के प्रथम गृह मंत्री चुने गए.


हमने आपको ऊपर सरदार वल्लभ भाई पटेल से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें बताई, हम आपको बताना चाहेंगे कि सरदार वल्लभ भाई पटेल का जीवन पूर्ण रूप से देश को समर्पित रहा तथा 15 दिसंबर 1950 को उन्होंने अपना शरीर त्याग दिया. सरदार वल्लभ भाई पटेल को भारतवर्ष में वह पहचान नहीं मिल पाई जो मिलनी चाहिए थी क्योंकि आजादी के बाद कुछ नेताओं ने देश की आजादी को एक परिवार की राजनीति बना कर रख दिया. भारत के इस महान पुरुष को उनकी मृत्यु के 41 साल बाद भारत रत्न का पुरस्कार मिला और अब जाकर 2018 में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में सरदार वल्लभ भाई पटेल को वह स्थान मिल रहा है जो उन्हें मिलना चाहिए था. भारत आईडिया सरदार वल्लभ भाई पटेल को नमन करता है तथा युवाओं से यह आंकड़ा करता है कि सरदार वल्लभ भाई पटेल की जीवनी को अपने जीवन का मार्गदर्शन बनाएं तथा देश हित में उनकी तरह अपने जीवन को समर्पित करें.




संपादक :  विशाल कुमार सिंह


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