पीएम नरेंद्र मोदी जी बोले नेपाल के बिना, हमारे धाम अधूरे और हमारे राम अधूरे....

जैसा की आप सब को पता है की अभी हमारे माननीय प्रधानमंत्री नेपाल दौरे पर है और आज का हमारा लेख इसी पर आधारित है, जानते है उनके दौरे के भाषण के मुख्या भागो पर। 




दो दिनों के नेपाल दौरे पर जनकपुर पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी  जी ने जानकी मंदिर जाकर पूजा-अर्चना की..

वहां मंजीरा बजाया और फिर वहां के पुजारियों से काफी देर तक बाते की. पूजा अर्चना के बाद मोदी जी ने जानकी मंदिर की परिक्रमा की। इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने मोदी जी का अभिवादन किया। मोदी जी ने भी हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन स्वीकार किया. प्रधानमंत्री मोदी जी ने जनकपुर और अयोध्या के बीच बस सेवा के लिए हरी झंडी दिखाई।


प्रधानमंत्री मोदी जी ने कहा कि रामायण सर्किट भारत और नेपाल के लिए दोनों के लिए खास है। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इस दौरान नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली भी पीएम मोदी जी के साथ रहे।

मामले से जुड़ी कुछ अहम जानकारियां:

१. नरेंद्र मोदी जी ने जनकपुर में आयोजित नागरिक अभिनंदन समारोह में कहां की २०१४में जब मैं प्रधानमंत्री के तौर पर पहली बार नेपाल आया था, तो संविधान सभा में मैंने कहा था कि जल्दी जनकपुर आऊंगा। मैं आपसे क्षमा चाहता हूं आने में थोड़ी देर हो गई. आज जानकी मंदिर में दर्शन कर , मेरी बहुत सालों की मनोकामनाएं पूरी हुई।

२. प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने कहा कि नेपाल और भारत दो देश है लेकिन इन दो देशों की मित्रता त्रेता युग से चली आ रही है। राजा जनक और राजा दशरथ ने सिर्फ जनकपुर और अयोध्या में ही नहीं, भारत और नेपाल को भी मित्रता और साझेदारी के बंधन में बांध दिया था। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने कहा कि नेपाल के बिना हमारे धाम अधूरे, नेपाल के बिना हमारे राम अधूरे।

३. पीएम मोदी जी ने कहा कि यह बंधन है राम और सीता का, बुद्ध का, महावीर का है .. यही बंधन रामेश्वरम में रहने वाले को खींच कर पशुपतिनाथ ले आता है. यही बंधन लुंबनी में रहने वाले को बोधगया में ले जाता है और यही बंधन, यही आस्था, यही स्नेह आज मुझे जनकपुर ले आया है।

४. पीएम मोदी जी ने कहा कि भारत नेपाल के संबंध किसी परिभाषा से नहीं बल्कि भाषा से बंधे हुए हैं। यह भाषा आस्था की है, यह भाषा अपनेपन की है और यह भाषा रोटी की है और यह भाषा बेटी की है.

५. PM मोदी ने कहा कि भारत और नेपाल दोनों देशों के बीच "रामायण" सर्किट बनाने की दिशा में काम करेंगे. यह दोनों देशों के बीच लोगों से संपर्क करने के लिए मजबूत लोगों के लिए आधार के रूप में कार्य करेगा।।

संपादक: आशुतोष उपाध्याय

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