छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्कूलों में सांस्कृतिक और नैतिक प्रार्थनाओं को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने सरस्वती वंदना और गायत्री मंत्र जैसे मंत्रों को स्कूलों में पढ़ाने के सरकारी आदेश को बरकरार रखा। यह फैसला उन ताकतों को करारा झटका है जो भारतीय संस्कृति और हिंदू परंपराओं को स्कूलों से हटाने की कोशिश कर रहे थे।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह याचिका समय से पहले दाखिल की गई है। कोर्ट को कोई सबूत नहीं मिला कि बच्चों के अधिकारों का हनन हो रहा है या किसी पर जबरदस्ती की जा रही है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 28(1) के तहत सरकारी स्कूलों में किसी खास धर्म की पूजा-पाठ पर रोक है, लेकिन बच्चों को अच्छे संस्कार, नैतिकता और सांस्कृतिक मूल्यों सिखाने पर कोई पाबंदी नहीं है।
सरकार का मजबूत पक्ष :
छत्तीसगढ़ सरकार ने कोर्ट में दलील दी कि सरस्वती वंदना, गायत्री मंत्र, दीप मंत्र, गुरु मंत्र और शांति मंत्र किसी एक धर्म विशेष के नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों का हिस्सा हैं। इनका उद्देश्य बच्चों में अनुशासन, बड़ों का सम्मान, पर्यावरण प्रेम और राष्ट्रभक्ति जगाना है। स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश के अनुसार, सुबह की सभा में राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, सरस्वती वंदना आदि का पाठ होता है। दोपहर के भोजन से पहले भोजन मंत्र और छुट्टी से पहले गायत्री मंत्र का जाप किया जाता है।
यह याचिका छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन अब्दुल सलाम रिजवी, अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व चेयरमैन महेंद्र छाबड़ा और शफीक अहमद ने दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का दावा था कि ये प्रार्थनाएं बच्चों की मर्जी के खिलाफ हैं और एक धर्म को बढ़ावा दे रही हैं।
संस्कार सिखाना जरूरी :
हाईकोर्ट ने कहा कि बच्चों को अच्छे संस्कार सिखाना गलत नहीं है। इससे वे बेहतर नागरिक बनते हैं और समाज में भाईचारा बढ़ता है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को यह भी छूट दी कि अगर भविष्य में किसी बच्चे के साथ कोई जबरदस्ती साबित होती है तो वे सबूतों के साथ दोबारा कोर्ट जा सकते हैं।
यह फैसला उन राज्यों के लिए उदाहरण है जहां हिंदू संस्कृति को स्कूलों में जगह देने का विरोध किया जाता है। राम मंदिर, UCC और अन्य मुद्दों के बाद यह फैसला सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को मजबूती देता है। छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम सराहनीय है, जिसने बच्चों को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का प्रयास किया।

