दवा कारोबारी के बेटे आयुष मलिक का धर्मांतरण कराने वाले सिंडिकेट का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया। सनातन धर्म में घर वापसी कर चुके आयुष के घर से पुलिस को मिली डायरी, चाकू, दो मोबाइल फोन और मौलाना की तस्वीर ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है।
पुलिस जांच में आयुष की डायरी का एक पन्ना सबसे चौंकाने वाला है। उसमें साफ लिखा है - “मैं मिशन पर हूँ” और नीचे आयुष के दस्तखत हैं। पुलिस का मानना है कि यह सब मुख्य आरोपी मौलाना इरफान के इशारे पर लिखा गया था। डायरी के साथ उर्दू में लिखे पर्चे, जलसे का निमंत्रण पत्र भी बरामद हुआ है। इसके अलावा आयुष के पास से एक चाकू भी मिला है, जिसकी जांच की जा रही है कि इसका इस्तेमाल क्या होना था।
आयुष ने एक नई ईमेल आईडी बनाई थी, जिसका पासवर्ड ‘2047’ रखा गया था। सुरक्षा एजेंसियां इसे PFI के इस्लामिक मिशन 2047 से जोड़कर देख रही हैं। मौलाना इरफान अभी फरार है और दिल्ली समेत कई जगहों पर छापेमारी जारी है।
इस पूरे मामले में चांदनी कुरैशी, उसके पिता और भाई को पहले ही जेल भेज दिया गया है। ये लोग संपत्ति हड़पने और प्रेम जाल में फंसाकर धर्मांतरण कराने के आरोप में फंसे हैं। कोर्ट ने इनकी जमानत याचिका पर 10 जुलाई को सुनवाई तय की है।
यह मामला साबित करता है कि कुछ मौलानाओं और उनके गिरोह किस तरीके से हिंदू युवाओं को निशाना बनाकर धर्मांतरण का खेल खेल रहे हैं। आयुष मलिक जैसे युवा प्रेम जाल में फंसकर अपना धर्म छोड़ने के कगार पर पहुंच गए थे, लेकिन समय रहते सनातन में लौट आए।
यूपी पुलिस की इस कार्रवाई की सराहना करनी चाहिए। लेकिन सवाल यह है कि ऐसे कितने मौलाना और सिंडिकेट अभी भी सक्रिय हैं? हिंदू बेटे-बेटियों को बचाने के लिए सख्त कानून और जागरूकता जरूरी है।
धर्मांतरण के खिलाफ सख्ती बढ़ानी होगी। UCC (Uniform Civil Code) लागू हो, तभी ये जिहादी गैंग रुकेंगे। शामली का यह मामला एक चेतावनी है - हिंदू समाज को सतर्क रहना होगा। घर वापसी के साथ-साथ ऐसे गिरोहों पर लगाम कसनी होगी।

