फैजल खान को पूरे भारत और विदेशों तक “खान सर” के नाम से जाना जाता है, लेकिन अब बिहार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने उनके इस टाइटल पर सवाल खड़ा कर दिया है। मंत्री जी ने साफ कहा है कि जो फैजल खान के छात्र नहीं हैं, वे उन्हें “सर” कहकर क्यों पुकारते हैं? उन्हें “सर” नहीं, बल्कि “खान जी” या “फैजल खान” ही कहना चाहिए।
दिलीप जायसवाल जी का यह बयान बिल्कुल सही है। ये कोचिंग वाले नाम के आधार पर बच्चों और अभिभावकों को नौकरी दिलाने के बड़े-बड़े झांसे देते हैं। असल में उनकी कोचिंग संस्थानों में पढ़ाई कम और राजनीतिक बयानबाजी, अनर्गल प्रचार ज्यादा होता है। छात्रों का भविष्य लूटकर खुद का साम्राज्य खड़ा करना इनका मुख्य धंधा बन गया है।
फैजल खान के कोचिंग संस्थान और ज्ञान बिंदु के बीच हुए विवाद ने पूरे मामले को खोलकर रख दिया है। इस लड़ाई के बाद अब बिहार सरकार शिक्षा माफियाओं के खिलाफ कड़े कानून लाने की तैयारी कर रही है। लाइसेंसिंग, फीस कैप, राजनीतिक गतिविधियों पर रोक और गुणवत्ता जांच जैसे सख्त नियम जल्द लागू होने वाले हैं।
फैजल खान पढ़ाने से कहीं ज्यादा नौटंकी का धंधा करते दिखते हैं। ब्रांड बनाकर लाखों-करोड़ों रुपये कमाना, छात्रों की भावनाओं से खेलना और शिक्षा की जगह सनसनी बेचना – ये सब अब बिहार की शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने वाले कारनामे हैं। गरीब परिवारों के बच्चे सपने लेकर कोचिंग जॉइन करते हैं, लेकिन इन माफियाओं के चंगुल में फंसकर उनका भविष्य अंधकारमय हो जाता है।
सरकार को अब सिर्फ बयानबाजी नहीं, ठोस एक्शन लेना चाहिए। सभी कोचिंग संस्थानों का सख्त ऑडिट हो, फर्जी वादों पर कार्रवाई हो और असली शिक्षकों को बढ़ावा मिले। बिहार के युवाओं का भविष्य इन माफियाओं के हाथों नहीं सौंपा जा सकता। असली गुरु वे हैं जो ज्ञान देते हैं, न कि जो सिर्फ नाम और ब्रांड बेचकर लूटते हैं।
#bharatidea

