उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में बकरीद के पवित्र त्योहार के दिन एक 17 वर्षीय हिंदू किशोर सूर्या चौहान की निर्मम हत्या कर दी गई। हमलावरों ने उसे घेरकर कहा, “क्या कभी बकरा हलाल होते देखा है? आज तुझे दिखाते हैं।” इसके बाद चाकुओं से ताबड़तोड़ वार किए गए। सूर्या की आंतें बाहर निकल आईं। नोएडा के फोर्टिस अस्पताल में इलाज के दौरान 29 मई को उसकी मौत हो गई। यह घटना न सिर्फ एक हत्या है, बल्कि सांप्रदायिक नफरत और पूर्व नियोजित साजिश का ज्वलंत उदाहरण है।
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घटना का विस्तृत विवरण
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28 मई 2026, बकरीद का दिन। दोपहर करीब 3:30 बजे गाजियाबाद के खोड़ा थाना क्षेत्र के नवनीत विहार में यह जघन्य वारदात हुई। सूर्या चौहान 11वीं कक्षा का छात्र था। वह अपनी मां, बड़े भाई यश चौहान और छोटी बहन के साथ रहता था। पिता की पहले ही मृत्यु हो चुकी थी।
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करीब 8 महीने पहले सूर्या का पड़ोस में रहने वाले असद नाम के युवक से मामूली विवाद हुआ था। असद ने इस पुरानी रंजिश का बदला लेने के लिए बकरीद का दिन चुना। उसने सूर्या को फोन कर बकरीद पार्टी के बहाने चौधरी स्कूल के पास गली नंबर 2 में बुलाया। सूर्या अपने दोस्त आयुष और विक्की के साथ पहुंचा।
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वहां पहले से ही असद, नवाब, फरहान, आतिफ, सारिक समेत 5-6 युवक हथियारों के साथ घात लगाए बैठे थे। जैसे ही सूर्या पहुंचा, उन्होंने उसे घेर लिया। चश्मदीदों के अनुसार, हमलावरों ने कहा, “क्या बकरा हलाल होते देखा है? आज हिंदू की कुर्बानी देंगे।” इसके बाद उन्होंने सूर्या के पेट, सीने और पूरे शरीर पर चाकू से अंधाधुंध वार किए। हमला इतना भीषण था कि सूर्या की आंतें बाहर आ गईं।
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सूर्या घायल अवस्था में 200 मीटर तक भागा, लेकिन गिर गया। शोर सुनकर भाई यश और मां दौड़े आए। हमलावर खून से लथपथ सूर्या को छोड़कर भाग गए। परिवार ने उसे तुरंत नोएडा के फोर्टिस अस्पताल पहुंचाया, जहां 29 मई को उसकी मौत हो गई।
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परिवार का दर्द और न्याय की गुहार
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सूर्या की मां और भाई यश का रो-रोकर बुरा हाल है। मां ने कहा कि असद ने बकरीद की बधाई देते हुए गले मिला और फिर पीठ में छुरा घोंप दिया। परिवार अब न्याय की मांग कर रहा है। हिंदू संगठन और स्थानीय लोग घटनास्थल पर जमा हुए। इलाके में सांप्रदायिक तनाव फैल गया, जिसे काबू में करने के लिए पुलिस को भारी बल तैनात करना पड़ा।
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पुलिस की कार्रवाई
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खोड़ा पुलिस ने सूर्या के भाई यश चौहान की तहरीर पर FIR दर्ज की। मुख्य आरोपियों में असद, नवाब, फरहान, आतिफ और सारिक के नाम शामिल हैं। पुलिस ने अब तक तीन नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। दो अन्य को हिरासत में लिया गया है। मुख्य आरोपी असद अभी फरार बताया जा रहा है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों के बयानों के आधार पर जांच कर रही है।
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सांप्रदायिक आयाम और समाज पर प्रभाव
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यह घटना केवल व्यक्तिगत रंजिश नहीं लगती। बकरीद जैसे त्योहार को हिंदू युवक की ‘कुर्बानी’ का माध्यम बनाने की मानसिकता बेहद खतरनाक है। ‘बकरा हलाल’ शब्दों का इस्तेमाल कर हत्या करना सांप्रदायिक नफरत को बढ़ावा देता है। गाजियाबाद जैसे संवेदनशील इलाके में ऐसी घटनाएं सामाजिक सद्भाव को गंभीर क्षति पहुंचाती हैं।
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विभिन्न हिंदू संगठनों ने इस हत्या की कड़ी निंदा की है। उन्होंने मांग की है कि सभी आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर सख्त सजा दी जाए। मायावती समेत कई नेताओं ने घटना पर दुख जताया और योगी सरकार से त्वरित कार्रवाई की अपील की।
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बढ़ते अपराध और कानून व्यवस्था की चुनौती
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गाजियाबाद में यह पहली ऐसी घटना नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में सांप्रदायिक आधार पर हिंसा की कई घटनाएं सामने आई हैं। युवाओं के बीच छोटी-छोटी रंजिशों को धार्मिक रंग देकर हत्या तक पहुंच जाना चिंताजनक प्रवृत्ति है। पुलिस को न सिर्फ इस मामले में निष्पक्ष जांच करनी चाहिए, बल्कि ऐसे भविष्य के अपराधों को रोकने के लिए भी प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
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परिवार की मांग है कि मुख्य आरोपी असद को जल्द पकड़ा जाए। सूर्या जैसे मासूम किशोर की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या त्योहारों के नाम पर हिंसा जारी रहेगी? क्या युवा अपनी जान लेकर बाहर निकलने से भी डरेंगे?
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निष्कर्ष
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सूर्या चौहान की हत्या एक निर्दोष परिवार को हमेशा के लिए उजाड़ देने वाली घटना है। 17 साल का एक छात्र, जो सपने देख रहा था, बकरीद के दिन पशु की तरह मार दिया गया। यह न सिर्फ परिवार के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए सदमा है।
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प्रशासन और पुलिस से अपील है कि इस मामले में कोई कोताही न बरती जाए। सभी दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। साथ ही समाज को भी सतर्क रहना होगा। छोटी रंजिशों को सांप्रदायिक रंग न लेने दें। सूर्या की आत्मा को शांति मिले और परिवार को न्याय मिले, यही कामना है।
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