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प्रेस फ्रीडम इंडेक्स: एक बड़ा धोखा!

भारत दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्था है। यहां की जनसंख्या लगभग 1.43 अरब है, जो इजराइल और फिलिस्तीन की संयुक्त जनसंख्या से करीब 97 गुना ज्यादा है। फिर भी, पत्रकारों की हत्याओं और प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में दोनों क्षेत्र भारत से बेहतर रैंकिंग पाते हैं। यह आंकड़ा सोचने पर मजबूर कर देता है।



2014 से अब तक भारत में कुल 28 पत्रकार मारे गए। इनमें से कई पर्यावरण, भ्रष्टाचार, लैंड माफिया और खनन घोटालों की खबरों पर काम कर रहे थे। रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) की रिपोर्ट के अनुसार, इन हत्याओं का बड़ा हिस्सा स्थानीय अपराधी तत्वों, राजनीतिक दबाव और माफियाओं से जुड़ा है। भारत जैसे विशाल देश में जहां करोड़ों लोग रहते हैं, 28 हत्याएं निश्चित रूप से चिंताजनक हैं, लेकिन इन्हें संदर्भ में देखना जरूरी है।

दूसरी ओर, इजराइल और फिलिस्तीन में 2014 से अब तक लगभग 300 पत्रकार मारे गए। अक्टूबर 2023 के बाद गाजा युद्ध में अकेले सैकड़ों मीडिया कर्मी मारे गए। गाजा सरकार मीडिया ऑफिस और CPJ (Committee to Protect Journalists) के आंकड़ों के मुताबिक, इजराइली हमलों में सैकड़ों फिलिस्तीनी पत्रकार शहीद हुए। कुछ रिपोर्ट्स 260 से ज्यादा की संख्या बताती हैं। युद्ध का माहौल, बमबारी और लक्षित हमले पत्रकारिता को बेहद खतरनाक बना देते हैं।

प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में स्थिति
2026 के विश्व प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में भारत 157वें स्थान पर है। वहीं फिलिस्तीन 156वें और इजराइल 116वें स्थान पर है। यानी छोटे क्षेत्रफल और कम जनसंख्या वाले ये क्षेत्र भारत से बेहतर रैंकिंग रखते हैं क्यूँ और कैसे?

यह तुलना कई सवाल खड़ी करती है। क्या प्रेस फ्रीडम का आकलन करते समय जनसंख्या, क्षेत्रफल और परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाना चाहिए? भारत में पत्रकारिता विशाल भू-भाग, विविधता और जटिल सामाजिक-राजनीतिक संरचना पर काम करती है। यहां एक छोटी खबर भी लाखों लोगों को प्रभावित कर सकती है। 

निष्कर्ष
प्रेस फ्रीडम इंडेक्स पर अंधा विश्वास करना खतरनाक भ्रम है। भारत को इस छलावे से मुक्त होकर अपनी प्रेस की आजादी को मजबूत करने की जरूरत है — लेकिन साथ ही ऐसे पक्षपाती इंडेक्स को बेनकाब भी करना चाहिए।

विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र अपने आकार, जटिलता और उपलब्धियों के आधार पर आंका जाना चाहिए, न कि RSF जैसे संगठनों की मनमानी रैंकिंग से।

प्रेस फ्रीडम इंडेक्स = प्रोपगैंडा इंडेक्स।
यह सिर्फ एक छलावा है, सच्चाई नहीं।