अल्लू अर्जुन को हैदराबाद स्टाम्पेड में चरित्र हनन करके जेल में ठूंस दिया गया, जहाँ पुष्पा 2 की प्रीमियर पर एक महिला की मौत हुई और उसके बेटे को गंभीर चोट लगी। अरे, अल्लू अर्जुन ने तो तुरंत 25 लाख का मुआवजा दिया, परिवार को सपोर्ट करने का वादा किया, लेकिन क्या हुआ? पुलिस ने घर में घुसकर उसे गिरफ्तार कर लिया, कोर्ट में घसीटा, और मीडिया ने चरित्र हनन का ऐसा तांडव मचाया जैसे वो कोई अपराधी हो!
लेकिन देखो अब जोसेफ विजय को! तमिलनाडु के करूर में उसके राजनीतिक रैली पर 39 लोग मारे गए – 9 बच्चे, 17 महिलाएँ, निर्दोषों का खून बह गया! 50 से ज्यादा घायल, स्टेज पर बस के ऊपर खड़े होकर भाषण दे रहा था, और भीड़ बेकाबू हो गई। माद्रास हाईकोर्ट ने पहले ही चेतावनी दी थी कि TVK की रैलियों में सेफ्टी लैप्सेस हो रहे हैं, अगर कुछ हुआ तो जिम्मेदारी कौन लेगा? लेकिन विजय? वो अभी भी आजाद घूम रहा है, जीरो अकाउंटेबिलिटी! कोई गिरफ्तारी नहीं, कोई चरित्र हनन नहीं, बस एक ट्वीट में "दिल टूट गया" कहकर बच निकला! क्या ये न्याय है? तमिलनाडु सरकार ने तो बस एक जज की कमीशन बना दी, लेकिन विजय पर कोई हाथ नहीं डाल रही – क्योंकि वो DMK का प्रतिद्वंद्वी है, वोट बैंक का खेल है! अल्लू अर्जुन को तो एक मौत पर जेल, और विजय को 39 मौतों पर फ्री पास? ये कैसा भेदभाव?
सोचो जरा, नाम में क्या रखा है? अल्लू अर्जुन – तेलुगु स्टार, BJP से जुड़े माने जाते हैं, तो दबाओ! जोसेफ विजय – तमिल राजनीति का 'थलापथी', DMK-BJP दोनों को ललकारता है, तो बचाओ! ये दिखा रहा है कि साउथ इंडियन सिनेमा में क्षेत्रीय राजनीति का जहर घुल गया है।
तेलुगु सितारों को कुचलो, तमिल को ऊपर चढ़ाओ – ये सेलिब्रिटी कल्चर का काला अध्याय है! नेटिजन्स चिल्ला रहे हैं, "विजय के हाथों पर खून है, गिरफ्तार करो!" लेकिन सरकार चुप, पुलिस चुप, क्योंकि वोट का डर! अल्लू अर्जुन ने गलती मानी, मुआवजा दिया, लेकिन बदनाम! विजय ने क्या किया? रैली में देरी से पहुँचा, भीड़ को पानी-खाना नहीं दिया, सिक्योरिटी फेल, लेकिन आजाद! ये दोहरा चरित्र बंद करो! साउथ की जनता, जागो! अगर स्टार पावर से मौतें हो रही हैं, तो अकाउंटेबिलिटी लाओ, चाहे नाम कुछ भी हो!
मोदी जी, स्टालिन, सुन लो! ऐसे गद्दारों पर सख्ती करो, वरना सिनेमा और राजनीति दोनों बर्बाद हो जाएंगे। विजय को सजा दो! जय हिंद! जय साउथ सिनेमा!

