Default Image

Months format

View all

Load More

Related Posts Widget

Article Navigation

Contact Us Form

404

Sorry, the page you were looking for in this blog does not exist. Back Home

Ads Area

स्टालिन सरकार का दोहरा मापदंड: तुष्टीकरण की राजनीति या शिक्षा सुधार?


तमिलनाडु |  तमिलनाडु में "डेंगू" सनातन और सम्मानित बाकी सब? ये है स्टालिन सरकार का असली चेहरा! 🔥

तमिलनाडु की डीएमके सरकार ने एक बार फिर तुष्टीकरण की राजनीति की सारी हदें पार कर दी हैं। SDPI – जो प्रतिबंधित आतंकी संगठन PFI की राजनीतिक शाखा मानी जाती है – उसकी माँग पर स्कूलों के पाठ्यक्रम में पैगंबर मोहम्मद पर कंटेंट जोड़ दिया गया है। क्या ये "शिक्षा सुधार" है या सीधे-सीधे वोटबैंक को खुश करने की शर्मनाक कोशिश?

यही स्टालिन, जो बीजेपी पर ‘सांप्रदायिक राजनीति’ का आरोप लगाते नहीं थकते, खुद खुलेआम कट्टरपंथियों को संतुष्ट करने में जुटे हैं। गाज़ा जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भाषण देने वाले स्टालिन, अपने ही राज्य में बहुसंख्यक समाज के साथ अन्याय कर रहे हैं।

सवाल ये है —
👉 क्या अब स्कूलों में धार्मिक शिक्षा भी राजनीतिक दलों की मांग पर तय होगी?
👉 क्या "सनातन धर्म" को "डेंगू" कहकर गाली देना सेक्युलरिज़्म है और बाकी धर्मों की हर माँग पर सिर झुकाना धर्मनिरपेक्षता?

🚨 देश में जब कोई सनातन की बात करता है, उसे 'फासिस्ट' कहा जाता है। लेकिन जब एक विशेष समुदाय को खुश करने के लिए पाठ्यक्रम बदला जाता है, तब सब चुप क्यों हो जाते हैं?

📢 ये सिर्फ तमिलनाडु की बात नहीं है — ये पूरे भारत के लिए एक चेतावनी है। अगर अब नहीं जागे, तो आने वाली पीढ़ियाँ सिर्फ तुष्टीकरण और धार्मिक पक्षपात की पाठशाला में पढ़ेंगी।

🙏 अब समय आ गया है कि हम इस ढोंगी सेक्युलरिज़्म और वोटबैंक की राजनीति के खिलाफ आवाज़ उठाएँ। धर्म को गाली देना फैशन बन चुका है, बशर्ते वो सनातन हो। बाकियों के लिए "सम्मान", और सनातन के लिए "अपमान"? यही है इनकी सेक्युलरिज़्म की परिभाषा!

✊ अब बहुत हुआ। सत्य बोलो, संगठित हो जाओ, और ऐसे दोहरे मापदंडों के खिलाफ खड़े हो जाओ।