कर्नाटक की राजनीति इन दिनों कांग्रेस के दो प्रमुख नेताओं से जुड़े भूमि विवादों से घिरी हुई है। राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रियंक खरगे के ट्रस्ट को जमीन आवंटित करने के मामले में जानकारी मांगी है। साथ ही, कर्नाटक हाई कोर्ट में मुख्यमंत्री सिद्दारमैया की पत्नी को दिए गए भूमि आवंटन के मामले की सुनवाई हो रही है। इन आरोपों ने कांग्रेस सरकार को बैकफुट पर ला दिया है और राजनीतिक विवाद तेज हो गए हैं।
1. राज्यपाल ने मांगी रिपोर्ट : कर्नाटक में कांग्रेस सरकार इन दिनों भूमि घोटालों के आरोपों से घिरी हुई है। राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रियंक खरगे के ट्रस्ट को दी गई जमीन के बारे में जानकारी मांगी है। इस मामले में आरोप है कि सरकार ने बेंगलुरु के औद्योगिक इलाके में खरगे परिवार के ट्रस्ट को जमीन आवंटित की थी। भाजपा नेताओं ने इस मुद्दे पर सवाल उठाए हैं, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ गया है।
2. सिद्दारमैया के परिवार पर आरोप: कोर्ट में जारी है सुनवाई : कर्नाटक हाई कोर्ट में मुख्यमंत्री सिद्दारमैया की पत्नी को मैसुरु विकास प्राधिकरण (MUDA) द्वारा जमीन देने के मामले की सुनवाई हो रही है। इस मामले में आरोप है कि जब सिद्दारमैया मुख्यमंत्री थे, तब उनकी पत्नी को गलत तरीके से जमीन दी गई थी। एक एक्टिविस्ट ने अदालत में बताया कि यह जमीन पहले सिद्दारमैया के बहनोई ने खरीदी थी और फिर इसे डी-नोटिफाई कर दिया गया था। बाद में यह जमीन सिद्दारमैया की पत्नी को गिफ्ट के तौर पर दी गई।
3. खरगे परिवार के ट्रस्ट को जमीन: राज्यपाल ने मांगी जानकारी : राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने कर्नाटक सरकार को पत्र लिखकर मल्लिकार्जुन खरगे के परिवार से जुड़े ट्रस्ट को दी गई जमीन के मामले में जानकारी मांगी है। यह जमीन सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट को दी गई थी, जिसके मुखिया राहुल खरगे हैं। भाजपा नेताओं का आरोप है कि इस ट्रस्ट को ऐसी जगह पर जमीन दी गई थी, जो एयरोस्पेस कंपनियों के लिए आरक्षित थी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि खरगे परिवार कब से एयरोस्पेस कंपनियां चला रहा है।
4. कलबुर्गी में जमीन का विवाद: भाजपा सांसद ने उठाए सवाल : बेंगलुरु के अलावा कलबुर्गी में भी जमीन के आवंटन का एक और मामला सामने आया है। भाजपा सांसद लहर सिंह सिरोया ने ट्वीट कर इस मुद्दे पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि गुलबर्गा में अंतर्राष्ट्रीय पाली, संस्कृत और तुलनात्मक दर्शन संस्थान को 19 एकड़ सरकारी जमीन मुफ्त में दी गई थी। यह संस्थान खरगे परिवार के सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट द्वारा संचालित किया जाता है। इस मुद्दे ने भी कांग्रेस सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
5. खरगे परिवार और एयरोस्पेस जमीन: विपक्ष के आरोप : भाजपा नेताओं का आरोप है कि खरगे परिवार के ट्रस्ट को दी गई जमीन एयरोस्पेस कंपनियों के लिए आरक्षित थी, फिर भी इसे ट्रस्ट को दे दिया गया। भाजपा नेता लहर सिंह सिरोया ने पूछा है कि आखिर खरगे परिवार कब से एयरोस्पेस कंपनी चलाने लगा। उन्होंने इस मामले की जांच की मांग की है और सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने अपने नेताओं को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों को दरकिनार किया।
6. सिद्दारमैया मामले में कोर्ट की सुनवाई: आगे की प्रक्रिया : मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के मामले में कर्नाटक हाई कोर्ट ने सोमवार (2 सितंबर, 2024) को सुनवाई की। इस मामले में एक्टिविस्ट के वकील ने कोर्ट को बताया कि नवंबर 2017 में निर्णय लिया गया था, जिसमें सिद्दारमैया की पत्नी को वैकल्पिक जमीन देने का फैसला किया गया था। कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख 9 सितंबर, 2024 तय की है। इस मामले में सिद्दारमैया ने अपनी भूमिका से इनकार किया है।
7. कांग्रेस सरकार पर बढ़ता दबाव: राजनीतिक उथल-पुथल : कर्नाटक की कांग्रेस सरकार इन सभी आरोपों और विवादों से घिर गई है। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के खिलाफ लगाए गए आरोपों से सरकार पर दबाव बढ़ गया है। वहीं, खरगे परिवार के ट्रस्ट को दी गई जमीन के मामले में भी विपक्ष ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला है। अगर इन मामलों की जांच होती है, तो राज्य में राजनीतिक उथल-पुथल और बढ़ सकती है, जिससे कांग्रेस सरकार की स्थिति कमजोर हो सकती है।
8. निष्कर्ष: कांग्रेस के लिए मुश्किल भरे दिन : कर्नाटक की राजनीति में भूमि विवादों ने कांग्रेस सरकार को मुश्किल में डाल दिया है। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और मल्लिकार्जुन खरगे के परिवार से जुड़े मामलों ने कांग्रेस को बैकफुट पर ला दिया है। राज्यपाल और हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद अब इन मामलों में जांच की संभावना है। अगर आरोप साबित होते हैं, तो कांग्रेस सरकार के लिए यह एक बड़ा झटका होगा। इन विवादों ने राज्य की राजनीति में नई उथल-पुथल पैदा कर दी है।

