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ममता दीदी मिडिया का रेप पर बात करना बंगाल विरोध कैसे हुआ ?

टीएमसी (तृणमूल कांग्रेस) ने पश्चिम बंगाल की सरकार पर उठ रहे सवालों के बीच मीडिया से बचने के लिए एक नई रणनीति अपनाई है। उन्होंने घोषणा की है कि पार्टी के प्रवक्ता ABP आनंदा, रिपब्लिक और TV9 जैसे चैनलों पर नहीं जाएंगे। टीएमसी ने इन चैनलों को "बंगाल विरोधी" बताया है और कहा कि ये दिल्ली के "जमींदारों" का प्रोपेगेंडा चला रहे हैं। इस कदम को प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला माना जा रहा है और भाजपा ने टीएमसी के इस फैसले की कड़ी आलोचना की है।

टीएमसी की मीडिया से दूरी : टीएमसी ने हाल ही में ABP आनंदा, रिपब्लिक और TV9 जैसे चैनलों पर अपने प्रवक्ता भेजने से इनकार किया है। टीएमसी का कहना है कि ये चैनल बंगाल विरोधी हैं और दिल्ली के जमींदारों के पक्ष में प्रोपेगेंडा चलाते हैं। इस फैसले की घोषणा सोशल मीडिया के माध्यम से की गई। पार्टी ने साफ किया कि ये चैनल राज्य सरकार की विफलताओं पर सवाल उठाते हैं और उन्हें अब इन पर कोई प्रवक्ता नहीं भेजा जाएगा।

2. चैनलों को "बंगाल विरोधी" कहना : टीएमसी ने ABP आनंदा, रिपब्लिक और TV9 चैनलों को "बंगाल विरोधी" करार दिया है। पार्टी का कहना है कि ये चैनल दिल्ली के जमींदारों के दबाव में काम कर रहे हैं और बंगाल सरकार के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। टीएमसी ने इस मुद्दे पर एक प्रेस रिलीज जारी करते हुए कहा कि ये चैनल दिल्ली के प्रमोटरों के इशारों पर काम कर रहे हैं और इनसे किसी भी प्रकार की निष्पक्षता की उम्मीद नहीं की जा सकती।

3. पार्टी समर्थकों से अपील : टीएमसी ने अपने समर्थकों से अपील की है कि वे इन चैनलों पर आने वाले कथित पार्टी समर्थकों की बातों से गुमराह न हों। पार्टी का कहना है कि इन लोगों को पार्टी की ओर से कोई अधिकार नहीं दिया गया है और वे पार्टी के आधिकारिक रवैये का प्रतिनिधित्व नहीं करते। टीएमसी ने इसे एक चेतावनी के रूप में पेश किया है ताकि लोग इन चैनलों की बातों पर ध्यान न दें।

4. टीएमसी की आलोचना और RG कर मामला : टीएमसी के इस फैसले को राज्य सरकार की विफलता पर उठते सवालों से बचने का प्रयास माना जा रहा है। हाल ही में कोलकाता के RG कर मेडिकल कॉलेज में एक महिला डॉक्टर के साथ रेप और हत्या के मामले ने राज्य सरकार को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। इस घटना के बाद टीएमसी सरकार की आलोचना तेज हो गई थी और मीडिया ने सरकार की लापरवाही पर सवाल उठाए थे।

5. प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला : टीएमसी का यह कदम प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला माना जा रहा है। पार्टी ने उन चैनलों को "बंगाल विरोधी" करार दिया है जो दशकों से बंगाल में सक्रिय हैं। उदाहरण के लिए, ABP आनंदा चैनल आनंद बाजार पत्रिका समूह का हिस्सा है, जो पिछले 100 सालों से कोलकाता में प्रकाशित हो रही है। यह कदम उन चैनलों को दबाने का प्रयास माना जा रहा है जो सरकार की आलोचना कर रहे हैं।

6. पत्रकारों पर हमले का इतिहास : पश्चिम बंगाल में पत्रकारों पर हमले का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले संदेशखाली के गुंडे शाहजहाँ शेख मामले की कवरेज कर रहे एक रिपोर्टर को बंगाल पुलिस ने लाइव टीवी के दौरान उठा लिया था। इसके अलावा भी कई पत्रकारों के उत्पीड़न के मामले सामने आए हैं। टीएमसी की सरकार पर लगातार प्रेस की स्वतंत्रता को दबाने के आरोप लगते रहे हैं।

7. भाजपा की प्रतिक्रिया : भाजपा ने टीएमसी के इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। बंगाल भाजपा ने कहा कि टीएमसी हमेशा तानाशाही करती रही है और अभिव्यक्ति की आजादी का विरोध करती रही है। भाजपा ने टीएमसी पर निराशा और सच्चाई का सामना करने में असमर्थता का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि टीएमसी सच्चाई से डरती है और इसीलिए वह मीडिया से भाग रही है।

8. प्रेस की स्वतंत्रता का महत्व : प्रेस की स्वतंत्रता लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इसे किसी भी सूरत में दबाया नहीं जाना चाहिए। टीएमसी का यह कदम पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर बड़ा हमला है। पार्टी को चाहिए कि वह मीडिया के सवालों का जवाब दे, न कि उनसे भागे। टीएमसी का यह निर्णय पश्चिम बंगाल की जनता के प्रति उसकी जिम्मेदारी को कमजोर करता है और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।