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भारत में ईसाई धर्मांतरण: क्या आपने सुना है कभी जोशुआ प्रोजेक्ट के विषय में।

सारांश, भारत में लंबे समय से हिंदू और जनजातीय समूहों को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिसमें जोशुआ प्रोजेक्ट की बड़ी भूमिका है। यह संगठन अमेरिकी फंडिंग से संचालित होता है और गरीब, पिछड़े हिंदुओं को निशाना बनाता है। इसके कार्यों में धर्मांतरण के लिए नैतिक-अनैतिक तरीकों का उपयोग शामिल है। इस लेख में जोशुआ प्रोजेक्ट के उद्देश्यों, कार्यप्रणाली, और इसके द्वारा भारत में फैलाए जा रहे धर्मांतरण के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है।

1. भारत में ईसाई धर्मांतरण का इतिहास
भारत में ईसाई धर्मांतरण की प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है, विशेष रूप से उन इलाकों में जहां लोग गरीबी और पिछड़ेपन से जूझ रहे हैं। ईसाई मिशनरियों द्वारा नैतिक-अनैतिक तरीकों का इस्तेमाल करके गरीब और पिछड़े हिंदुओं को ईसाइयत की ओर आकर्षित किया जा रहा है। इसके लिए अच्छे इलाज, शिक्षा, और अन्य सेवाओं का प्रलोभन दिया जाता है, ताकि लोग अपना धर्म छोड़कर ईसाइयत को अपनाएं। इस धर्मांतरण के पीछे विदेशी फंडिंग का भी बड़ा हाथ है, जो ईसाईयत के प्रसार में सहायक बन रही है।

2. जोशुआ प्रोजेक्ट: उद्देश्य और कार्यप्रणाली
जोशुआ प्रोजेक्ट एक अमेरिकी संगठन है, जिसका मुख्य उद्देश्य उन समुदायों में ईसाइयत का प्रचार करना है, जहां अब तक इसका प्रभाव नहीं पहुंचा है। 1995 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य है, भारत की जातियों, जनजातियों और अन्य समूहों को ईसाइयत में परिवर्तित करना। जोशुआ प्रोजेक्ट अपनी वेबसाइट पर दावा करता है कि यह बाइबल के मैथ्यू 28:19 के निर्देशों का पालन कर रहा है, जिसमें सभी लोगों को ईसाइयत में लाने और उनका बप्तिस्मा कराने का आदेश दिया गया है।

3. जोशुआ प्रोजेक्ट के द्वारा जुटाए गए आँकड़े
जोशुआ प्रोजेक्ट का मुख्य कार्य उन समूहों के आँकड़े इकट्ठा करना है, जहां अब तक ईसाइयत का प्रचार नहीं हुआ है। भारत में, इस संगठन ने 2000 से अधिक जातियों और समुदायों के आँकड़े इकट्ठे किए हैं। जोशुआ प्रोजेक्ट इन आँकड़ों का उपयोग करके उन समूहों में धर्मांतरण के प्रयास करता है, जिनमें अब तक ईसाइयत का प्रभाव नहीं पड़ा है। यह संगठन अपने काम को पाँच स्तरों में विभाजित करता है, जिनमें से सबसे निचले स्तर पर 'अनरीचड' समुदाय आते हैं।

4. 10:40 विंडो और भारत में ईसाइयत का प्रसार
जोशुआ प्रोजेक्ट ने विश्व के नक़्शे पर एक क्षेत्र को ‘10:40 विंडो’ नाम दिया है, जिसमें भारत, चीन, सऊदी अरब, और म्यांमार जैसे देश आते हैं। इस विंडो में पड़ने वाले देशों में ईसाइयत का प्रसार सबसे कम हुआ है। जोशुआ प्रोजेक्ट का मानना है कि इन देशों में ईसाइयत का प्रचार करने की सबसे अधिक जरूरत है, क्योंकि यह देश अब तक ईसाइयत का विरोध करते रहे हैं। इस विंडो के तहत, जोशुआ प्रोजेक्ट ने भारत में 2272 जातियों और जनजातियों को चिह्नित किया है, जिनमें ईसाइयत का प्रभाव नहीं हुआ है।

5. एजेंटों की नियुक्ति और उनका कार्य
जोशुआ प्रोजेक्ट भारत में अपने कार्यों को तेजी से बढ़ाने के लिए एजेंटों की नियुक्ति कर रहा है। ये एजेंट धर्मांतरण के साथ ही नए चर्च बनाने का कार्य भी करते हैं। दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन एजेंटों को लम्बी ट्रेनिंग के बाद जमीन पर उतारा जाता है और उन्हें लगभग ₹2000 की तनख्वाह दी जाती है। इन एजेंटों का मुख्य कार्य उन इलाकों में जाकर आँकड़े इकट्ठा करना होता है, जहां अभी तक ईसाइयत का प्रभाव नहीं हुआ है। यह कार्य गुप्त रूप से किया जाता है ताकि समाज में किसी प्रकार का विवाद न हो।

6. धर्मांतरण के आंकड़े और सफलता दर
जोशुआ प्रोजेक्ट के अनुसार, उन्होंने भारत में 2272 समूहों तक ईसाइयत का प्रचार किया है, लेकिन इनमें से केवल 103 जातियों में ही आंशिक सफलता मिली है। 128 जाति समूहों में बड़े पैमाने पर धर्मांतरण हो चुका है। इसके साथ ही, जोशुआ प्रोजेक्ट की वेबसाइट पर यह दावा किया गया है कि अब तक 143 करोड़ लोगों में से 6 करोड़ लोगों तक ईसाइयत का प्रचार हो चुका है। यह आंकड़े जोशुआ प्रोजेक्ट के लिए एक बड़ी सफलता के रूप में देखे जाते हैं, क्योंकि इसका मुख्य उद्देश्य इन समूहों को ईसाइयत में लाना है।

7. भारत में इवैंजेलिकल ईसाइयत की वृद्धि
जोशुआ प्रोजेक्ट के अनुसार, भारत में इवैंजेलिकल ईसाइयत की वृद्धि दर 3.9%/वर्ष है, जो वैश्विक औसत से कहीं अधिक है। यह वृद्धि दर्शाती है कि भारत में ईसाइयत का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। इवैंजेलिकल ईसाइयत एक विशेष शाखा है, जिसे जोशुआ प्रोजेक्ट फैलाने का प्रयास कर रहा है। यह शाखा उन लोगों को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जो पूरी तरीके से जोशुआ प्रोजेक्ट के ढाँचे में ढल चुके हैं। इस बढ़ती संख्या ने भारत में धार्मिक और सामाजिक तनाव को भी बढ़ावा दिया है।

8. भारत में जोशुआ प्रोजेक्ट की आलोचना और चुनौतियाँ
जोशुआ प्रोजेक्ट की गतिविधियों को लेकर भारत में काफी विरोध हुआ है। धर्मांतरण के लिए गरीब और पिछड़े हिंदुओं को निशाना बनाने की रणनीति की आलोचना की गई है। कई मामलों में ईसाई प्रचारकों को प्रलोभन देने और धोखाधड़ी के आरोपों में गिरफ्तार किया गया है। मध्य प्रदेश और बरेली जैसे स्थानों पर हाल ही में ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां ईसाई धर्मांतरण के लिए धन का प्रलोभन दिया जा रहा था। इसके बावजूद, जोशुआ प्रोजेक्ट का नेटवर्क लगातार काम करता जा रहा है।

9. जोशुआ प्रोजेक्ट के खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता
भारत में जोशुआ प्रोजेक्ट की गतिविधियों के खिलाफ सरकार और समाज को सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है। यह संगठन न केवल धार्मिक अस्थिरता को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी कमजोर कर रहा है। धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर चल रहे इस प्रकार के धर्मांतरण के प्रयासों को रोका जाना चाहिए। इसके लिए सरकार को कड़े कानून बनाने और उनकी सख्ती से पालन कराने की आवश्यकता है। समाज को भी जागरूक होकर इन प्रयासों का विरोध करना चाहिए, ताकि धार्मिक और सामाजिक एकता बनी रहे।