अधीर रंजन चौधरी, एक अनुभवी कांग्रेस सांसद, ने हाल ही में अपने हार के बाद की कठिनाइयों को उजागर किया है। चुनावी पराजय के बाद, कांग्रेस के शीर्ष नेताओं द्वारा उनके साथ संवाद की कमी ने उनकी पीड़ा को और बढ़ा दिया है। वे इस बात से हैरान हैं कि पार्टी के वरिष्ठ नेता उनके लिए प्रचार करने नहीं आए।
पार्टी नेतृत्व का समर्थन न मिलना :
चौधरी ने अपने वक्तव्य में कहा, "कांग्रेस के बड़े नेता मेरे लिए प्रचार करने क्यों नहीं आए, मुझे नहीं पता। खड़गे जी ने मालदा में प्रचार किया, मेरे क्षेत्र में नहीं।" यह कथन उनके भीतर की निराशा और पार्टी नेतृत्व के प्रति उनकी नाराजगी को दर्शाता है।
आर्थिक कठिनाइयाँ और दिल्ली आवास :
एक BPL सांसद होने के नाते, चौधरी को अब अपना दिल्ली आवास खाली करना होगा। इस आवास का इस्तेमाल उनकी बेटी अपनी पढ़ाई के लिए करती थी, और अब उन्हें दूसरा घर किराए पर खोजना होगा। उन्होंने अपनी वित्तीय कठिनाइयों का उल्लेख करते हुए कहा, "मेरे घर को मेरी बेटी पढ़ाई के लिए इस्तेमाल करती है, अब मुझे दूसरा घर किराए पर खोजना होगा। ममता सरकार से लड़ने के लिए मैंने अपने आय के स्रोत भी गंवाए हैं।"
राजनीति के अलावा कोई कौशल नहीं :
चौधरी ने यह भी स्वीकार किया कि राजनीति के अलावा उनके पास और कोई कौशल नहीं है। उन्होंने कहा, "राजनीति के अलावा मेरे पास और कोई कौशल नहीं है। अब मेरे सामने मुश्किलें होंगी, मुझे नहीं पता कैसे पार पाऊंगा।"
ममता के साथ कांग्रेस का गठबंधन: आत्महत्या के समान :
अधीर रंजन चौधरी ने कांग्रेस और ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के गठबंधन को आत्महत्या के समान बताया। उनका मानना है कि यह गठबंधन कांग्रेस के लिए घातक साबित हो सकता है।

