प्राचीन भारत का गणितीय योगदान :
1.अंक और शून्य का आविष्कार
307 ई. पूर्व भारत में अंकों का आविष्कार हुआ। आर्यभट्ट ने शून्य का आविष्कार किया, जिसने गणितीय गणना को सरल और सटीक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
2.अंकगणित और बीजगणित
पूर्व भास्कराचार्य ने अंकगणित का आविष्कार किया और आर्यभट्ट ने बीजगणित का। इन वैज्ञानिकों ने गणित के इन क्षेत्रों को विकसित किया, जो आज भी शिक्षण और अनुसंधान के महत्वपूर्ण आधार बने हुए हैं।
3.ग्रहों की गणना और त्रिकोणमिति
आर्यभट्ट ने 499 ई. पूर्व में ग्रहों की गणना की। भारतीय विद्वानों को त्रिकोणमिति और रेखागणित का 2,500 ई. पूर्व से ज्ञान था, जो उनके वैज्ञानिक और ज्योतिषीय अध्ययन में सहायक था।
समय और काल की गणना :
1.सूर्य सिद्धांत और प्राचीन कैलेंडर
लतादेव ने 505 ई. पूर्व में "सूर्य सिद्धांत" नामक अपनी पुस्तक में समय और काल की गणना का वर्णन किया। यह ग्रंथ विश्व का पहला कैलेंडर बनाने में सहायक बना।
गुरुत्वाकर्षण और भास्कराचार्य :
1.गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत
भास्कराचार्य ने न्यूटन से भी पहले गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत प्रतिपादित किया। यह सिद्धांत आज के वैज्ञानिक अध्ययन और अनुसंधान में आधारभूत है।
प्राचीन धातु विज्ञान और चिकित्सा
1.लोहे का प्रयोग
3,000 ई. पूर्व वेदों में लोहे के प्रयोग का उल्लेख मिलता है, जिसका प्रमाण अशोक स्तम्भ में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
2.प्लास्टिक सर्जरी
लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्डस् के अनुसार, 400 ई. पूर्व सुश्रूत द्वारा सर्वप्रथम प्लास्टिक सर्जरी का प्रयोग किया गया। सुश्रूत को भारतीय चिकित्सा का जनक माना जाता है।
शिक्षा और विश्वविद्यालय :
1.तक्षशिला विश्वविद्यालय
विश्व का पहला विश्वविद्यालय तक्षशिला के रूप में 700 ई. पूर्व भारत में स्थापित हुआ था, जहाँ दुनिया भर के 10,500 विद्यार्थी 60 विषयों का अध्ययन करते थे। यह शिक्षा का प्रमुख केंद्र था।
बारुद और प्रकाश की गति :
1.बारुद की खोज
8,000 ई. पूर्व सर्वप्रथम बारुद की खोज भारत में हुई।
2.प्रकाश की गति
सूर्य से पृथ्वी पर पहुँचने वाले प्रकाश की गति की गणना सर्वप्रथम भास्कराचार्य ने की, जिससे भौतिकी के अध्ययन को नया आयाम मिला।
गणितीय मान और संवत्सर :
1.पाई की गणना
छठी शताब्दी में बोद्धायन ने पाई के मान की गणना की, जो पाइथोगोरस प्रमेय के रूप में जाना जाता है। यह गणितीय ज्ञान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
2.विक्रम संवत्
दुनिया का पहला संवत् "विक्रम संवत्" पूरे एशिया से शकों को परास्त करते हुये अवन्ति के चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य महान ने प्रवर्तित किया, जो ईसा पूर्व 56 से आरम्भ हुआ।
आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी :
1.वायरलेस कम्युनिकेशन
महान वैज्ञानिक डां. जगदिशचन्द्र बसु ने पहला वायरलेस कम्युनिकेशन का आविष्कार किया, जो बाद में विकसित होकर मोबाइल और इंटरनेट के रूप में परिवर्तित हुआ।
2.प्रकाश के सात रंग
डां. सी. व्ही. रमन ने पहली बार दुनिया को बताया कि सूर्य किरण में सात रंग होते हैं, जिसके लिए उन्हें नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
अर्थशास्त्र और राजनीति :
1.अर्थशास्त्र का पहला ग्रंथ
कौटिल्य ने दुनिया के पहले अर्थशास्त्र नामक पुस्तक लिखी, जो आज भी राजनीति और अर्थशास्त्र के अध्ययन में महत्वपूर्ण है।
2.पहला संविधान
दुनिया का पहला संविधान भारत में लिखा गया। राजा मनु ने मनुस्मृति के रूप में इसका रचना की, जो राजनितीशास्त्र का पहला महान ग्रंथ है।
अन्य महत्वपूर्ण योगदान :
1.नाव और सोने के सिक्के
नाव का अविष्कार और सोने के सिक्कों का चलन आर्यावर्त की ही देन है।
2.पारा निर्माण विधियाँ
वैज्ञानिक नागार्जुन एवं महर्षि चरक ने सर्वप्रथम पारा (mercury) बनाने की विधियाँ दुनिया को दी।
3.एक्यूप्रेशर चिकित्सा
एक्यूप्रेशर चिकित्सा, जो आज चीन में भी विकसित है, वह तक भारत की ही देन है।
4.मार्शल आर्ट प्रणाली
बोधिवर्मन की मार्शल आर्ट प्रणाली भारत की ही प्राचीन देन है, जिसमें श्रीकृष्ण निष्णात और पारंगत योद्धा थे।
निष्कर्ष :
भारतीय संस्कृति और विज्ञान का इतिहास अत्यंत गौरवशाली और समृद्ध है। हमारे प्राचीन विद्वानों और वैज्ञानिकों ने जिन अविष्कारों और सिद्धांतों का प्रतिपादन किया, वे आज भी विश्वभर में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों में उपयोगी हैं। जय सनातन धर्म!

