2003 में कर्नाटक मे एसएम कृष्णा के नेतृत्व मे काँग्रेस की सरकार थी... प्रवीण तोगड़िया जी को मंगलौर जिले मे घुसने पर ही प्रतिबंध लगा दिया... वहाँ के ए.डी.एम. के आदेश के माध्यम से! सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली!!लेकिन प्रवीण जी को अपनी आजादी पर खतरा महसूस नहीं हुआ?? मई 2013 मे राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व में काँग्रेस की सरकार थी... अजमेर में एक कार्यक्रम कुछ भाषण को लेके 19 अपराधिक मामले दर्ज करा दिया गया प्रवीण भाई तोगड़िया पर...!
लेकिन फिर भी उन्हे अपनी आजादी पर खतरा महसूस नहीं हुआ?? 2013 मे उत्तर प्रदेश में अखिलेश जी के नेतृत्व मे सपा की सरकार थी... अयोध्या मे पंचकोशी परिक्रमा को लेके..उ.प्र. पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया प्रवीण भाई तोगड़िया को! लेकिन प्रवीण भाई को अपनी आजादी पर खतरा महसूस नहीं हुआ...? 2014 में चुनाव के समय ही... किसी भाषण को ले कर चुनाव आयोग के निर्देश पर गुजरात में ही मुकद्दमा दर्ज हो गया... लेकिन खतरा महसूस नहीं हुआ प्रवीण भाई को...!
पुन: 2016 में कर्नाटक में घुसने पर प्रतिबंध लगाया... काँग्रेसी सरकार ने! लेकिन इस बार कर्नाटक हाई कोर्ट ने... प्रवीण भाई को... भाषण न देने... चुप रहने की शर्त पर श्रृंगेरी जाने की अनुमति दे दी थी...! लेकिन... लेकिन इसके बावजूद भी प्रवीण भाई को ये नहीं लगा कि... उनकी आवाज दबायी गयी हो...?
आज 19 राज्यों में BJP की सरकार है... पिछले दिनों कहीं भी ये सुनने में नहीं आया कि... प्रवीण भाई तोगड़िया जी को किसी BJP शासित राज्य में घुसने से रोका गया हो... या उनको भाषण देने से प्रतिबंधित किया गया हो...? तो फिर क्यूँ प्रवीण भाई तोगड़िया जी को ये लगने लगा कि... उन्हें बोलने से रोका जा रहा है...?? वो भी राम मंदिर के मुद्दे पर... गौ संबंधी विधि पर बोलने से रोका जा रहा है...?
जहाँ तक... राम मंदिर का प्रश्न है... तो पिछले कुछ माह से ही... केंद्र सरकार और उ. प्रदेश सरकार के साथ साथ कुछ और लोगों को ये प्रयास करते देखा गया कि राम मंदिर का मुद्दा आपसी समझौते व सहयोग से सुलझ जाये... और न्यायिक प्रयास में भी तेजी दिखायी गयी.. ऐसे में प्रवीण भाई तोगड़िया क्या बोलना चाहते थे कि... जिससे उन्हें रोका गया...? गौवंश के मुद्दे पर भी केंद्र सरकार के कुछ सर्कुलर जारी हुये थे जिसके विरोध में काँग्रेस का एक कार्यकर्ता तो केरल में खुले आम गाय ही मार कर खा गया...
औऱ वामपंथियों ने तो जगह जगह बीफ पार्टी का ही लुफ्त लेना शुरू कर दिया... तो प्रवीण भाई तोगड़िया क्या बोलना चाहते थे इस मुद्दे पर??? प्रवीण भाई अगर कुछ बोलना ही चाहते थे... तो उसे लिख कर रख लेते... बाद मे छपवा कर पर्चा बँटवाते या पूरा ग्रंथ ही प्रकाशित करवा देते... या मेरी तरह सोशल मीडिया पर ही कुछ लिख कर अपने 'बोलने' की इच्छा की पूर्ति कर लेते...?? लेकिन... काँग्रेसी और सपा सरकारों के राज्यों मे प्रवीण भाई को आधिकारिक तौर पर बोलने रोका जा रहा था...
तब प्रवीण भाई को अपनी आजादी खतरे में पड़ती हुयी नहीं दिखलायी पड़ी... लेकिन आज... उनकी आजादी बिना किसी आधिकारिक/ राजकीय प्रतिबंध के ही खतरे में है... तो ये वाकई सोचने वाली बात है??? वैसे एक बात बता दूँ कि भारतीय पुलिस इतनी बेवकूफ भी नहीं है कि किसी Z+ सुरक्षा लिये हुए ऐसे व्यक्ति को गोली चलाकर गिरफ्तार करने का प्रयास करे जो मृत्यु दंड या आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध मे वाँछनीय न हो!!
पुलिस इनकाउंटर का आधिकारिक सौभाग्य उन्हीं को मिलता है जो... मृत्यु दंड या आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध में वांछनीय हो...! पुलिस वालों को भी कानून व अदालतों को जबाब देना पडता है? किसी के कहने मात्र से कोई पुलिस अधिकारी अपनी गर्दन नहीं फँसवाता?? प्रवीण भाई आप पर तो ऐसे केस का आरोप भी नहीं था... तो फिर ये इनकाऊंटर वाला ड्रामा क्यूँ??? जरा पिछले दिनों को याद कर लेते भाई कि आजादी पर खतरा किसे कहते हैं????
वैसे प्रवीण भाई जी, आपने नाम सम्मान बहुत कमाया है! आपके प्रयासों का प्रतिफल ही है कि आज उस शासन से अपनी आजादी की गुहार लगा रहे हैं... जिस पर आपकी आजादी बचाने का नैतिक दायित्व है! और जिनके बहकावे में आप ये गुहार लगा रहे हैं... उनका आपके प्रति कोई नैतिक दायित्व नहीं है!?? ये आप 2003 से लेकर 2016 तक के अपने ऊपर लगे आरोपों का अध्ययन करके देख सकते हैं?
तो आप व्यक्तिक अवाँछनीय ईर्ष्या से वशीभूत होकर ऐसा कुछ न करें कि... छद्म भेंड़ियों के झुण्ड को मौका मिले और आप ही लोगों के प्रयास से जो कुछ आज है वो ध्वस्त हो जायेगा...!?? जरा सी व्यक्तिगत ईर्ष्या व महत्वाकाँक्षा... आपके नाम और सम्मान को ही ध्वस्त कर देगी !?? थोड़ा इतिहास याद कर लें कि एक रघुनाथ राव की ईर्ष्या व महत्वाकाँक्षा पूरे मराठा साम्राज्य को नष्ट कर दिया था...।। अत: आप प्रवीण भाई ऐसा न ही होने दें तो बहुत ही अच्छा है... आपके पास सर्जरी का हुनर भी है... कुछ दिन उसी में मन लगाएं!

