भारत की दबंग आईपीएस, जिन्होंने मंत्री को मारा था थप्पड़ तथा मुख्यमंत्री से भी गई थी भीड़.

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका भारत आइडिया में तो दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं एक ऐसी आईपीएस के बारे में जिसकी इमानदारी की मिसाल...



नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका भारत आइडिया में तो दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं एक ऐसी आईपीएस के बारे में जिसकी इमानदारी की मिसाल हर जगह दी जाती है, जिन्होंने अपनी आत्मरक्षा तथा स्वाभिमान को बचाने के लिए मुख्यमंत्री तक से दो दो हाथ कर लिए थे. तो आइए जानते हैं कौन है यह आईपीएस.


क्या है खबर :
सोनिया नारंग 2002 बैच की कर्नाटक की चर्चित आईपीएस अधिकारी हैं जो अपने फौलादी हौसले और काम के लिए जानी जाती हैं. पंजाब युनिवर्सिटी से समाजशासत्र विषय में 1999 में गोल्ड मेडल हासिल करने वाली सोनिया नारंग खुद एक नौकरशाही की बेटी हैं. देवनगिरि की एसपी रहते हुए 2006 में सोनिया तब चर्चा में आई थीं जब होनाली में कांग्रेस और बीजेपी के दो कद्दावर नेता आपस में भिड़ गये थे. उस समय सोनिया ने भाजपा नेता रेनुकाचार्य को थप्पड़ जड़ दिया था.सोनिया एक तरफ फौलादी इरादों की आईपीएस मानी जाती हैं तो दूसरी तरफ उन्हें पुलिस अधिकारियों में उनके व्यवहार और उनकी काबिलियत के लिए सम्मान भी मिलता है.


एक नेता को जड़ चुकी है थप्पड़ :
सोनिया अपनी 13 साल की नौकरी में कर्नाटक के कई बड़े शहरों में तैनात रहीं, इस दौरान वह जहां भी गईं, अपराधियों को भागने पर मजबूर कर दिया. साल 2006 में एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस और बीजेपी के 2 कद्दावर नेता आपस में भिड़ गए थे, तब आईपीएस सोनिया ने बीजेपी के एक नेता रेनुकाचार्य को सरेआम थप्पड़ जड़ दिया था. हालांकि, बाद में यही नेता (रेनुका) मंत्री भी बने थे.उस वक्त सोनिया देवनगिरि जिले की एसपी थीं.उन्हें कई बार सम्मान मिल चुका है.


मुख्यमंत्री को भी नहीं छोड़ा था :
मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने आईपीएस सोनिया का नाम 16 करोड़ के खदान घोटाले में लिया, तो राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप मच गया था.सीएम ने विधानसभा में घोटाले से जुड़े अधिकारियों के नाम उजागर किए थे, उनमें एक नाम सोनिया नारंग का भी था. सोनिया ने मुख्यमंत्री के आरोपों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था और खुलकर विरोध किया था. उन्होंने कहा, मेरी अंतरात्मा साफ है आप चाहें तो किसी भी तरह की जांच करा लें, मैं इस आरोप का न सिर्फ खंडन करती हूं बल्कि इसका कानूनी तरीके से हर स्तर पर विरोध करूंगी. सोनिया ने उस वक्त मुख्यमंत्री सिद्दारमैया से भी दो-दो हाथ करने के लिए कमर कस ली थी और खुद ईमानदार साबित भी किया था.