बलात्कार के मामलों की जल्द सुनवाई के लिए कानून मंत्रालय की योजना / Law Ministry's plan for early hearing of rape cases

प्रस्तावित योजना में आधारभूत ढांचा और अभियोजन तंत्र को मजबूत करने, निचली अदालतों के लिए न्यायिक अधिकारियों की आवश्यक संख्या, लोक अभियोजको...

प्रस्तावित योजना में आधारभूत ढांचा और अभियोजन तंत्र को मजबूत करने, निचली अदालतों के लिए न्यायिक अधिकारियों की आवश्यक संख्या, लोक अभियोजकों के अतिरिक्त पदों, विशेष जांचकर्ताओं और खास फोरेंसिक किटों के प्रावधान शामिल होंगे।



विधि मंत्रालय बलात्कार के मामलों की जल्दी सुनवाई के लिए देश भर में फास्ट ट्रैक अदालतों की स्थापना तथा बेहतर अनुसंधान एवं त्वरित अभियोजन के लिए बुनियादी ढांचों को मजबूत बनाने के लिए जल्द ही एक योजना का प्रस्ताव करेगा.

दुष्कर्म के मामलों से संबंधित अनुसंधान और अभियोजन को मजबूत बनाने के लिए नयी योजना हाल ही में जारी एक अध्यादेश का हिस्सा है जिसके तहत अदालतें १२ साल तक की बच्चियों के साथ बलात्कार के मामलों में अभियुक्तों को मौत की सजा सुना सकती हैं. आपराधिक कानून (संशोधन) अध्यादेश में आईपीसी, सीआरपीसी, साक्ष्य कानून और बच्चों को यौन अपराध से सुरक्षा कानून में संशोधन किया गया.

प्रस्तावित योजना में आधारभूत ढांचा और अभियोजन तंत्र को मजबूत करने, निचली अदालतों के लिए न्यायिक अधिकारियों की आवश्यक संख्या, लोक अभियोजकों के अतिरिक्त पदों, विशेष जांचकर्ताओं और खास फोरेंसिक किटों के प्रावधान शामिल होंगे।


कानून मंत्रालय में सचिव (न्याय) ने कैबिनेट सचिव पीके सिन्हा को हाल ही में लिखे एक पत्र में कहा कि न्याय विभाग ने योजना तैयार करने के लिए कार्रवाई शुरू करते हुए यह महसूस किया कि उचित होगा कि यह योजना गृह मंत्रालय लागू करे. क्योंकि अधिकतर कार्य गृह मंत्रालय से जुड़े हैं. उन्होंने कहा कि कानून मंत्रालय इस मुद्दे को गृह मंत्रालय के साथ उठाएगा. इस प्रस्ताव के जल्दी ही कैबिनेट के समक्ष आने की उम्मीद है।

कठुआ और सूरत में बच्चियों के साथ दुष्कर्म की घटनाओं के बाद देशव्यापी रोष के बीच सरकार ने अप्रैल में अध्यादेश जारी किया था. अध्यादेश के अनुसार ऐसे मामलों से निपटने के लिए नए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे और बलात्कार के मामलों के लिए सभी पुलिस स्टेशनों और अस्पतालों को विशेष फोरेंसिक किट दिए जाएंगे।